Inflation Rate : सरकार पहली बार नई सीरीज के हिसाब से खुदरा महंगाई के आंकड़े जारी करने वाली है. इस बार महंगाई का अनुमान लगाने के लिए खाद्य वस्तुओं की हिस्सेदारी को कम कर दिया गया है. नई सीरीज में साल 2024 के आधार पर कीमतों को रखा गया है और इसी हिसाब से खुदरा महंगाई के आंकड़ों को जारी किया जाएगा. इसका पहला अनुमान जनवरी में आ रहा है, जहां दिसंबर के मुकाबले खुदरा महंगाई की दर करीब दोगुनी रहने का अनुमान लगाया जा रहा है.
खुदरा महंगाई की दर जनवरी में बढ़ सकती है.
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने एक सर्वे में बताया है कि भारत की वार्षिक उपभोक्ता महंगाई दर जनवरी में लगातार तीसरे महीने बढ़कर 2.4% होने की संभावना है. यह अनुमान अर्थशास्त्रियों के पोल में सामने आया है. इसकी वजह खाद्य पदार्थों की कीमतों में तेजी और सोने-चांदी के दामों में बढ़ोतरी के साथ-साथ पिछले साल के अनुकूल आधार प्रभाव का कम होना है. जनवरी से 2024 की नई कीमतों पर आधारित डेटा सीरीज शुरू होगी और अगस्त के बाद पहली बार महंगाई दर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 2%-6% के लक्ष्य दायरे में लौटेगी.
महंगाई दर में शामिल होंगे नए घटक
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के आंकड़े 12 फरवरी को जारी किए जाएंगे, जिसमें नए घटक वेटिंग्स शामिल होंगी. खासतौर पर खाद्य पदार्थों का वेट घटाकर करीब 37% कर दिया गया है, जो पहले साल 2012 की सीरीज में लगभग 46% था. खाद्य पदार्थ CPI का सबसे अस्थिर घटक माना जाता है. 2.4% का औसत अनुमान दिसंबर के 1.33% (पुरानी सीरीज के अनुसार) से काफी ज्यादा है. यह रायटर के 34 अर्थशास्त्रियों के 5 से 9 फरवरी के बीच किए गए पोल में सामने आया. अनुमान 1.40% से 3.10% के बीच रहे और कई अर्थशास्त्रियों ने इस महीने नई सीरीज पर स्पष्टता का इंतजार करते हुए अनुमान लगाने से परहेज किया.
क्या कहते हैं एक्यसपर्ट
स्टैंडर्ड चार्टर्ड में इंडिया इकोनॉमिक रिसर्च की प्रमुख अनुभूति सहाय ने कहा कि पिछले साल की असामान्य रूप से कम कीमतों के आधार प्रभाव के हटने के अलावा खाद्य और कोर महंगाई दोनों के और बढ़ने की संभावना है. कोर महंगाई, जिसमें अस्थिर खाद्य और ईंधन को शामिल नहीं किया जाता और जो वास्तविक मांग को बेहतर दर्शाती है, विश्लेषकों के अनुसार जनवरी में 4.60% तक पहुंच सकती है, जो दिसंबर के लगभग बराबर है. हालांकि भारत आधिकारिक तौर पर कोर महंगाई के आंकड़े जारी नहीं करता.
खाद्य कीमतों की गिरावट खत्म
सहाय ने कहा कि जनवरी में सोने और चांदी की कीमतें दिसंबर के मुकाबले काफी ज्यादा थीं. पिछले साल डेटा में जो खाद्य कीमतों में गिरावट दिख रही थी, वह अब खत्म हो गई है और खाद्य कीमतें फिर से कुल महंगाई को ऊपर ले जा रही हैं. जनवरी में सोने की कीमतें 13% तक बढ़ीं, जबकि चांदी करीब 19% चढ़ी. कुल मिलाकर, आगे चलकर महंगाई में उतार-चढ़ाव कम रहने की उम्मीद है. ज्यादातर अर्थशास्त्रियों का मानना है कि पुरानी CPI वेटिंग्स, खासकर खाद्य पदार्थों का बड़ा हिस्सा, महंगाई को जरूरत से ज्यादा अस्थिर और खाद्य आपूर्ति के झटकों के प्रति संवेदनशील बना देता था.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें
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