Income-Tax Rules 2026 : वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026 में ऐलान कर दिया है कि 1 अप्रैल से शुरू होने वाले नए वित्तवर्ष के साथ ही इनकम टैक्स का नया नियम भी लागू हो जाएगा. उन्होंने कहा था कि इनकम टैक्स रिटर्न के फॉर्म में बदलाव के साथ कई पुराने नियमों को अपग्रेड भी किया गया है. इसका असर नौकरीपेशा व्यक्ति के साथ आम आदमी पर भी दिखेगा. साथ ही इससे आईटीआर भरना भी और आसान हो जाएगा.
वित्तमंत्री ने कहा था कि 1 अप्रैल से लागू होने वाले नए इनकम टैक्स कानून को और सरल बनाया जाएगा. साथ ही रिटर्न दाखिल करना भी आसान किया जाएगा, ताकि आम आदमी को अपना आईटीआर खुद भरने में आसानी हो. इसके लिए किसी एक्सपर्ट या पेशेवर की जरूरत न पड़े. इसके लिए जल्द ही आईटीआर के सभी फॉर्म को नोटिफाई किया जाएगा. इसमें पहले से ही ज्यादातर जानकारियां भरी होंगी, खासकर नौकरीपेशा व्यक्ति के लिए यह फॉर्म काफी काम का होगा.

आयकर नियम, 2026 (ड्राफ्ट) के नियम 15 के तहत, जब कोई कार आंशिक रूप से ऑफिस के काम और आंशिक रूप से निजी काम के लिए इस्तेमाल की जाती है और उसके चलाने व रखरखाव का खर्च नियोक्ता द्वारा दिया या चुकाया जाता है, तो टैक्स योग्य मूल्य 1.6 लीटर तक की कार के लिए 5,000 रुपये प्रति माह और 1.6 लीटर से अधिक की कार के लिए 7,000 रुपये प्रति माह प्रस्तावित किया गया है. अगर ड्राइवर भी उपलब्ध कराया जाता है तो अतिरिक्त 3,000 रुपये प्रति माह जोड़े जाएंगे.

इससे पहले आयकर नियम, 1962 के नियम 3 के तहत यह मूल्य काफी कम था. अभी तक 1.6 लीटर तक की कार के लिए 1,800 रुपये प्रति माह या 1.6 लीटर से अधिक की कार के लिए 2,400 रुपये प्रति माह और अगर ड्राइवर दिया गया हो तो 900 रुपये प्रति माह अतिरिक्त जोड़ा जाता है. अगर कार आंशिक रूप से ऑफिस और आंशिक रूप से निजी काम के लिए इस्तेमाल होती है, लेकिन निजी उपयोग और रखरखाव का पूरा खर्च कर्मचारी खुद उठाता है, तो ड्राफ्ट 2026 नियमों के अनुसार टैक्स योग्य मूल्य 1.6 लीटर तक की कार के लिए 2,000 रुपये प्रति माह और 1.6 लीटर से अधिक की कार के लिए 3,000 रुपये प्रति माह प्रस्तावित है. अगर नियोक्ता ड्राइवर देता है तो 3,000 रुपये प्रति माह अतिरिक्त जोड़े जाएंगे.
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के तहत, नियोक्ता द्वारा कर्मचारियों को दिए जाने वाले उपहारों पर वार्षिक टैक्स छूट की सीमा 5,000 रुपये से बढ़ाकर 15,000 रुपये कर दी गई है. इससे कर्मचारियों को अधिक लचीलापन और कर-कुशल गैर-नकद लाभ मिल सकेंगे. इस नियम के तहत नियोक्ता की ओर से कर्मचारियों को मिलने वाला गिफ्ट पर टैक्स छूट बढ़ जाएगी.

आयकर नियम, 1962 के नियम 3(7)(iii) के अनुसार, नियोक्ता द्वारा दिए गए पेड वाउचर के जरिये मुफ्त भोजन, जो केवल खाने के स्थानों पर ही भुनाए जा सकते हैं और ट्रांसफर नहीं किए जा सकते और टैक्स से छूट के दायरे में आते हैं. अभी इसकी अधिकतम सीमा प्रति भोजन 50 रुपये है. नए ड्राफ्ट आयकर नियम, 2026 के नियम 15(5)(a) टेबल IV में इस सीमा में बड़ी छूट का प्रस्ताव दिया गया है. ड्राफ्ट के अनुसार, ऐसे भोजन वाउचर के लिए टैक्स छूट की सीमा बढ़ाकर प्रति भोजन 200 रुपये कर दी गई है, बशर्ते अन्य सभी निर्धारित शर्तें पूरी की जाएं.

इनकम टैक्स नियम, 1962 के नियम 3(5) के अनुसार, नियोक्ता द्वारा कर्मचारी के बच्चों को दी जाने वाली मुफ्त या रियायती शिक्षा को टैक्स योग्य परिक्विजिट माना जाता था, जिसमें छूट केवल 1,000 रुपये प्रति माह प्रति बच्चे तक सीमित थी. यह छूट केवल तब लागू होती थी जब शिक्षा नियोक्ता के स्वामित्व या देखरेख वाले संस्थान में दी जाती थी. हालांकि, इनकम टैक्स नियम, 2026 के नियम 15(4) टेबल III के अनुसार, यह सीमा बढ़ाकर 3,000 रुपये प्रति माह प्रति बच्चे कर दी गई है. संशोधित सीमा से अधिक राशि अब भी परिक्विजिट के रूप में टैक्स योग्य रहेगी.

आयकर नियम, 1962 के नियम 3(7)(i) के अनुसार, नियोक्ता द्वारा चिकित्सा उपचार के लिए बिना ब्याज या रियायती दर पर दिए गए कर्ज को कर योग्य परिलाभ माना जाता था, जब तक कि कुल कर्ज राशि 20,000 रुपये से अधिक न हो या यह कर्ज किसी मान्यता प्राप्त अस्पताल में निर्दिष्ट बीमारियों के इलाज के लिए न दिया गया हो. आयकर नियम, 2026 के नियम 15(5)(a) तालिका IV के अनुसार, अब इस छूट को काफी बढ़ा दिया गया है और नियोक्ता द्वारा चिकित्सा उपचार के लिए दिए गए 2,00,000 रुपये तक के कर्ज को कर योग्य परिलाभ नहीं माना जाएगा. केवल इससे अधिक राशि पर ही टैक्स चुकाना होगा.
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