दिवालिया कानून में बदलाव के लिए बनाई गई समिति की लगभग सभी सिफारिशों को केंद्रीय कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है. जल्द ही संसद में विधेयक पेश किया जा सकता है और वहां से पास होने के बाद नए कानून देश में लागू हो जाएंगे. नए कानून में कई बड़े बदलाव किए गए हैं जिससे दिवाला प्रक्रिया पहले से ज्यादा प्रभावी और तेज हो गई है.
नए कानून में प्रक्रिया को फास्ट्रैक किया गया है.
आईयू एक रजिस्टर्ड इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफॉर्म है जो क्रेडिटर्स जैसे, बैंक, एनबीएफसी या फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस और कर्ज लेने वाली कंपनियों के बीच के रिकॉर्ड को सुरक्षित रखता है. इससे यह बहुत आसानी से पता चल जाता है कि कंपनी ने क्रेडिटर्स का कितना कर्ज नहीं चुकाया है. नए नियम के तहत यहां मौजूद जानकारी को प्राथमिकता दी जाएगी. यानी आईयू पर अगर साबित हो गया कि कंपनी ने पैसा नहीं चुकाया है तो एनसीएलटी को 14 दिन के अंदर कॉर्पोरेट इन्सॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस या सीआईआरपी शुरू करने के लिए अनुमति देनी होगी. पहले इस प्रक्रिया में बहुत लंबा समय लग जाता था क्योंकि यह पूरी तरह एनसीएलटी के विवेक पर निर्भर था कि वह डिफॉल्ट के दावों को कब प्रमाणित करता है. भारत में अभी नेशनल ई-गवर्नेंस सर्विस लिमिटेड एक प्रमुख आईयू है.
और क्या-क्या बदला
- क्रेडिटर-लेड इनसॉल्वेंसी: पहले कई बार कंपनियां ‘स्टे’ (Stay) लेकर या तकनीकी कमियां निकालकर प्रक्रिया को लटका देती थीं. अब नियंत्रण पूरी तरह से लेनदारों (बैंकों/फाइनेंशियल संस्थानों) के हाथ में है. जैसे ही डिफॉल्ट होता है, वे ड्राइवर की सीट पर आ जाते हैं.
- ग्रुप इनसॉल्वेंसी: भारत में कई बड़े ग्रुप्स की एक ही प्रमोटर के तहत दर्जनों कंपनियां होती हैं. पहले ऐसी कंपनियों के खिलाफ 5 या जितनी उनकी कंपनियां हैं उतने अलग केस चलाने पड़ते थे. अब अब उन्हें एक ही ‘ग्रुप रेजोल्यूशन’ के तहत लाया जा सकता है. इससे कानूनी खर्च बचेगा.
- क्रॉस-बॉर्डर इनसॉल्वेंसी: यह विजय माल्या या नीरव मोदी जैसे मामलों से निपटने के लिए सबसे जरूरी हथियार है. अब भारतीय कोर्ट और विदेशी कोर्ट एक-दूसरे के साथ सहयोग कर पाएंगे. अगर किसी डिफॉल्टर की प्रॉपर्टी लंदन या दुबई में है, तो उसे भारत की दिवाला प्रक्रिया का हिस्सा बनाना आसान हो जाएगा.
- लिक्विडेशन में सुधार और वैल्यू मैक्सिमाइजेशन: लिक्विडेशन का मतलब है कंपनी की आखिरी सांसें. पहले जब कंपनी बंद होती थी, तो उसकी मशीनें और जमीन कौड़ियों के दाम बिकती थीं. अब फोकस इस पर है कि कंपनी को ‘टुकड़ों’ में बेचने के बजाय ‘As a going concern’ (यानी चलती-फिरती हालत में) बेचा जाए.
कब आएगा नया कानून
फिलहाल नई सिफारिशों को संसद में पेश किया जाएगा. खबरों के अनुसार, यह काम इसी सत्र में किया जा सकता है. बताया जा रहा है कि कैबिनेट ने पुराने कानून में संशोधन के लिए जो पार्लियामेंट सेलेक्ट कमिटी बनी थी उसकी लगभग सभी सिफारिशों को हरी झंडी दिखा दी है. अब विधेयक को संसद में लाकर पास कराने की देरी है और उसके बाद भारत में नए दिवालिया कानून लाग हो जाएंगे.
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जय ठाकुर 2018 से खबरों की दुनिया से जुड़े हुए हैं. 2022 से News18Hindi में सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं और बिजनेस टीम का हिस्सा हैं. बिजनेस, विशेषकर शेयर बाजार से जुड़ी खबरों में रुचि है. इसके अलावा दे…और पढ़ें
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