पंजाब नेशनल बैंक घोटाले में अब नीरव मोदी के बाद उसके भाइयों और कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों पर भी कानूनी शिकंजा कसता दिख रहा है. मुंबई की विशेष अदालत ने नीशल मोदी, नेहल मोदी और कंपनी के दो अधिकारियों को नोटिस जारी कर पूछा है कि उन्हें भगोड़ा आर्थिक अपराधी क्यों न घोषित किया जाए. अगर कोर्ट ऐसा करती है तो सरकार उनकी भारत और विदेश में मौजूद संपत्तियों को जब्त कर सकती है.
नीरव मोदी
अदालत ने इन सभी से पूछा है कि उन्हें आधिकारिक तौर पर भगोड़ा आर्थिक अपराधी क्यों न घोषित कर दिया जाए. यह कदम इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि अगर कोर्ट किसी व्यक्ति को इस श्रेणी में घोषित कर देती है तो सरकार को उसकी संपत्तियां जब्त करने का अधिकार मिल जाता है, चाहे वे भारत में हों या विदेश में.
अदालत ने किन लोगों को भेजा नोटिस
मुंबई की विशेष अदालत ने नीरव मोदी के दो भाइयों नीशल मोदी (Nishal Modi) और नेहल मोदी (Nehal Modi) को नोटिस जारी किया है. इसके साथ ही नीरव मोदी की कंपनियों से जुड़े दो वरिष्ठ अधिकारियों आदित्य नानावती (Aditya Nanavati) और संदीप मिस्त्री (Sandeep Mistry) को भी अदालत ने जवाब देने के लिए कहा है.
जांच एजेंसियों का आरोप है कि इन लोगों ने नीरव मोदी के साथ मिलकर पूरे वित्तीय नेटवर्क को संचालित किया और बैंक से निकाले गए पैसे को अलग अलग रास्तों से छिपाने में भूमिका निभाई. अदालत ने इन सभी को अपना पक्ष रखने के लिए 7 मई तक का समय दिया है.
भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित होने का मतलब
भारत में भगोड़ा आर्थिक अपराधी कानून उन लोगों के खिलाफ बनाया गया है जो बड़े आर्थिक अपराध करने के बाद देश छोड़कर भाग जाते हैं और अदालत के सामने पेश नहीं होते. अगर किसी व्यक्ति को इस कानून के तहत भगोड़ा घोषित कर दिया जाता है तो उसकी चल और अचल संपत्तियों को जब्त किया जा सकता है. इस कानून का मकसद यह है कि आर्थिक अपराध करने वाले लोगों को विदेश में बैठकर भारतीय न्याय व्यवस्था से बचने का मौका न मिले. सरकार ऐसे मामलों में जब्त की गई संपत्तियों के जरिए बैंकों और निवेशकों के नुकसान की भरपाई करने की कोशिश करती है.
आरोप क्या हैं
जांच एजेंसियों के मुताबिक नेहल मोदी पर आरोप है कि उसने नीरव मोदी के काले धन को विदेशी कंपनियों और जटिल वित्तीय लेनदेन के जरिए छिपाने में मदद की. वह फिलहाल अमेरिका में है और भारत लाए जाने के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ रहा है. दूसरी तरफ नीशल मोदी पर आरोप है कि उसने दुबई में फर्जी पार्टनरशिप और डमी कंपनियों के जरिए इस नेटवर्क को चलाने में भूमिका निभाई. वहीं आदित्य नानावती और संदीप मिस्त्री नीरव मोदी की कंपनियों में वरिष्ठ पदों पर थे और जांच एजेंसियों के मुताबिक वे पूरे फर्जीवाड़े की प्रक्रिया से वाकिफ थे.
क्या था पंजाब नेशनल बैंक घोटाला
पंजाब नेशनल बैंक घोटाला भारत के बैंकिंग इतिहास के सबसे बड़े घोटालों में गिना जाता है. इस मामले में नीरव मोदी और उसके मामा मेहुल चोकसी (Mehul Choksi) पर करीब 23,780 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का आरोप है. जांच में सामने आया था कि बैंक के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से फर्जी लेटर ऑफ अंडरटेकिंग यानी एलओयू जारी किए गए थे. इन दस्तावेजों के आधार पर विदेशों से कर्ज लिया गया और बाद में उस रकम को वापस नहीं किया गया. इसी तरीके से धीरे धीरे हजारों करोड़ रुपये का घोटाला सामने आया.
नीरव मोदी पहले ही घोषित हो चुका है भगोड़ा
नीरव मोदी को साल 2019 में ही भारतीय अदालत ने भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित कर दिया था. वह फिलहाल ब्रिटेन की जेल में बंद है और भारत उसे प्रत्यर्पित कराने की कोशिश कर रहा है. अब जांच एजेंसियों की नजर उसके पूरे नेटवर्क पर है. अगर अदालत नीरव मोदी के भाइयों और सहयोगियों को भी भगोड़ा घोषित करती है तो सरकार उनके खिलाफ भी संपत्ति जब्ती की बड़ी कार्रवाई कर सकती है.
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जय ठाकुर 2018 से खबरों की दुनिया से जुड़े हुए हैं. 2022 से News18Hindi में सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं और बिजनेस टीम का हिस्सा हैं. बिजनेस, विशेषकर शेयर बाजार से जुड़ी खबरों में रुचि है. इसके अलावा दे…और पढ़ें
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