हालांकि भारत सरकार का मानना है कि फिलहाल देश में महंगाई पर इसका बड़ा असर पड़ने की संभावना कम है. संसद में दिए लिखित जवाब में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि भारत में खुदरा महंगाई अभी भारतीय रिजर्व बैंक के निर्धारित लक्ष्य दायरे के निचले स्तर के करीब बनी हुई है, जिससे बाहरी कीमतों के झटकों से निपटने के लिए कुछ गुंजाइश मौजूद है.
महंगाई पर असर सीमित रहने का अनुमान
वित्त मंत्री ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में तेल की कीमतों में आई तेजी का महंगाई पर बहुत बड़ा असर होने का अनुमान नहीं लगाया गया है. उन्होंने कहा, “भारत में महंगाई अभी लक्ष्य दायरे के निचले स्तर के आसपास है, इसलिए इस समय महंगाई पर प्रभाव ज्यादा होने का अनुमान नहीं है.”
तेल की कीमतों में तेज उछाल
मिडिल ईस्ट में बढ़ते संघर्ष के कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज तेजी देखी गई. तेल की कीमतें शुरुआती कारोबार में करीब 26 प्रतिशत तक उछल गईं और जुलाई 2022 के बाद के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गईं. यह तेजी ऐसे समय आई जब ईरान ने मोजतबा खामेनेई को देश के सर्वोच्च नेता के उत्तराधिकारी के रूप में नामित किया. यह फैसला उस समय लिया गया जब ईरान के सर्वोच्च नेता आयतोल्ला अली खामेनेई की एक हफ्ते पहले अमेरिका और इजरायल की एयर स्ट्राइक में मौत हो गई थी.
सप्लाई बाधित होने की आशंका
इस घटनाक्रम के बाद मिडिल ईस्ट से तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका बढ़ गई है. कई प्रमुख तेल उत्पादक देशों ने शिपमेंट कम कर दी है क्योंकि टैंकरों के लिए हॉर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित रूप से गुजरना मुश्किल हो गया है. यह मार्ग दुनिया के कच्चे तेल की आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है.
भारतीय बास्केट में भी तेजी
सरकार के आंकड़ों के मुताबिक भारतीय बास्केट का कच्चा तेल फरवरी के अंत में 69.01 डॉलर प्रति बैरल था. भू राजनीतिक तनाव बढ़ने के बाद 2 मार्च तक यह बढ़कर 80.16 डॉलर प्रति बैरल हो गया.
महंगाई फिलहाल 3 प्रतिशत से नीचे
भारत में खुदरा महंगाई अभी अपेक्षाकृत कम बनी हुई है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार जनवरी में खुदरा महंगाई दर 2.75 प्रतिशत रही, जो भारतीय रिजर्व बैंक के 2 से 6 प्रतिशत के लक्ष्य दायरे के निचले हिस्से के करीब है.
तेल बढ़े तो महंगाई पर कितना असर
वित्त मंत्री ने Reserve Bank of India की अक्टूबर 2025 की मौद्रिक नीति रिपोर्ट का भी हवाला दिया. रिपोर्ट के मुताबिक अगर कच्चे तेल की कीमतों में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी होती है और उसका पूरा असर घरेलू ईंधन कीमतों में दिखता है, तो महंगाई में करीब 30 बेसिस पॉइंट यानी 0.30 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो सकती है.
हालांकि इसका वास्तविक असर कई अन्य कारकों पर भी निर्भर करता है, जैसे
- रुपये की विनिमय दर
- वैश्विक मांग और आपूर्ति की स्थिति
- मौद्रिक नीति का प्रभाव
- समग्र महंगाई का स्तर
- ईंधन कीमतों का अप्रत्यक्ष असर
तेल में उतार चढ़ाव जारी
सोमवार को कच्चे तेल की कीमतें 115 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गई थीं, क्योंकि मिडिल ईस्ट में युद्ध तेज होने से उत्पादन और शिपिंग को खतरा बढ़ गया था. हालांकि कुछ ही घंटों बाद अमेरिकी तेल की कीमतों में तेजी से गिरावट भी देखने को मिली. रिपोर्ट्स के मुताबिक जी7 देश रणनीतिक भंडार से तेल जारी करने पर विचार कर रहे हैं, जिसके बाद कीमतें दो घंटे से भी कम समय में करीब 16 डॉलर प्रति बैरल गिरकर 103 डॉलर से नीचे आ गईं.
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