बजट 2026 के बाद सरकार का पूरा फोकस नॉन-टैक्स रेवेन्यू पर है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ₹80,000 करोड़ का विनिवेश लक्ष्य रखकर यह साफ कर दिया है कि CPSEs की बिक्री और IDBI बैंक जैसे बड़े निजीकरण अब पाइपलाइन में सबसे ऊपर हैं. राजकोषीय घाटे को 4.3% तक सीमित रखने के लिए विनिवेश से मिलने वाला यह फंड संजीवनी का काम करेगा. हालांकि, सरकार ने सरकारी कंपनी की परिभाषा में तत्काल बदलाव से मना कर दिया है, लेकिन कैबिनेट द्वारा स्वीकृत सभी पुराने प्रस्तावों पर अब फास्ट-ट्रैक मोड में काम शुरू होगा.
सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए विनिवेश और सरकारी संपत्तियों के जरिए ₹80,000 करोड़ जुटाने का एक बहुत बड़ा लक्ष्य रखा है. अगर इसकी तुलना पिछले साल से करें तो यह आंकड़ा काफी ज्यादा है, क्योंकि पिछले साल का संशोधित अनुमान केवल ₹33,837 करोड़ था. सरकार का इरादा इस बड़ी रकम के जरिए अपनी कमाई बढ़ाना है ताकि टैक्स के अलावा भी पैसा आता रहे और आम जनता पर बोझ कम हो. वित्त मंत्री का मानना है कि विनिवेश की यह तेज रफ्तार ही भविष्य के सालों के लिए कमाई का रास्ता साफ करेगी.
विनिवेश की नई रणनीति: क्या-क्या है खास?
IDBI बैंक का निजीकरण: लंबे समय से अटकी हुई IDBI बैंक की बिक्री अब अपने ‘एडवांस्ड फेज’ (तीसरे चरण) में पहुँच गई है. वित्त मंत्री ने उम्मीद जताई है कि इसकी प्रक्रिया जल्द ही पूरी हो जाएगी. सरकार इसमें अपनी और LIC की कुल 60.72% हिस्सेदारी बेचने की तैयारी में है.
LIC में और हिस्सेदारी की बिक्री: सूत्रों के अनुसार, सरकार वित्त वर्ष 2027 में LIC में भी अपनी हिस्सेदारी का एक हिस्सा (लगभग 3%) बेचकर करीब ₹20,000 करोड़ जुटाने की योजना बना रही है.
एसेट मोनेटाइजेशन: ₹80,000 करोड़ के इस लक्ष्य में केवल कंपनियों की बिक्री ही नहीं, बल्कि सड़कों, रेलवे और बिजली जैसे बुनियादी ढांचे के मुद्रीकरण (Monetization) से होने वाली कमाई भी शामिल है.
इकोनॉमिक सर्वे का सुझाव और सरकार का रुख: इकोनॉमिक सर्वे ने सुझाव दिया था कि सरकार को कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी घटाकर 26% कर देनी चाहिए ताकि कंट्रोल भी बना रहे और पैसा भी आए. हालांकि, वित्त मंत्री ने फिलहाल ‘सरकारी कंपनी’ की परिभाषा बदलने के विचार से इनकार किया है.
बजट 2026: राजकोषीय अनुशासन के आंकड़े
| पैमाना (Indicator) | FY26 (Revised) | FY27 (Target) | लक्ष्य का प्रभाव |
| राजकोषीय घाटा | 4.4% | 4.3% | अर्थव्यवस्था में स्थिरता और महंगाई पर लगाम |
| विनिवेश लक्ष्य | ₹33,837 Cr | ₹80,000 Cr | इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए अतिरिक्त फंड |
| डेट-टू-जीडीपी | 56.1% | 55.6% | 2031 तक 50% पर लाने का लॉन्ग-टर्म प्लान |
बजट घाटे को कम करने और कर्ज घटाने की रणनीति
इस आक्रामक विनिवेश नीति का सीधा संबंध देश के बजट घाटे को कम करने से जुड़ा हुआ है. सरकार ने अगले साल के लिए राजकोषीय घाटे का लक्ष्य 4.3% रखा है और वह चाहती है कि देश पर कर्ज का बोझ भी कम हो. 2031 तक सरकार इस कर्ज को काफी नीचे लाने का इरादा रखती है. ₹80,000 करोड़ का यह फंड सरकार को बिना नया कर्ज लिए सड़कों, पुलों और रेलवे जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स पर खर्च करने की ताकत देगा, जिससे देश की आर्थिक स्थिति और मजबूत होगी.
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जय ठाकुर 2018 से खबरों की दुनिया से जुड़े हुए हैं. 2022 से News18Hindi में सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं और बिजनेस टीम का हिस्सा हैं. बिजनेस, विशेषकर शेयर बाजार से जुड़ी खबरों में रुचि है. इसके अलावा दे…और पढ़ें
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