बजट में एसटीटी बढ़ाने के फैसले ने शेयर बाजार को झटका दिया है. सरकार को इससे हजारों करोड़ रुपये की अतिरिक्त कमाई की उम्मीद है. लेकिन इसी फैसले से बाजार पूंजीकरण में भारी गिरावट देखने को मिली. अब इस टैक्स बढ़ोतरी के असर पर निवेशक और ट्रेडर्स के बीच बहस तेज हो गई है.
क्यों बढ़ाया गया एसटीटी
बाजार के एक वर्ग का मानना है कि सरकार का मकसद डेरिवेटिव्स में बढ़ती रिटेल सट्टेबाजी पर लगाम लगाना है. सेबी की एक स्टडी के मुताबिक, डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग करने वाले 10 में से 9 छोटे निवेशकों को नुकसान उठाना पड़ता है. ऐसे में एसटीटी बढ़ाकर सरकार अत्यधिक जोखिम भरे ट्रेड को हतोत्साहित करना चाहती है. कुछ दिग्गज निवेशकों का कहना है कि लंबे समय में इससे बाजार को स्थिरता मिलेगी और अनावश्यक सट्टेबाजी कम होगी.
ट्रेडर्स और ब्रोकर्स की बढ़ी चिंता
दूसरी ओर, ट्रेडर्स और ब्रोकिंग इंडस्ट्री इस फैसले से खासे परेशान हैं. उनका कहना है कि एसटीटी बढ़ने से ट्रेडिंग कॉस्ट काफी बढ़ जाएगी, जिससे फ्यूचर्स और ऑप्शंस में कारोबार घट सकता है. खासकर हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग और आर्बिट्राज जैसी रणनीतियां महंगी हो जाएंगी. जब बाजार पहले से ही कमजोर धारणा में हो, ऐसे समय में टैक्स बढ़ाना निवेशकों की भागीदारी और लिक्विडिटी दोनों को नुकसान पहुंचा सकता है.
पहले से सुस्त हो रहा था बाजार
सेबी के आंकड़े बताते हैं कि डेरिवेटिव्स में सुस्ती पहले ही दिखने लगी थी. दिसंबर 2025 में इक्विटी फ्यूचर्स का औसत दैनिक कारोबार महीने-दर-महीने 11 फीसदी घटा, जबकि ऑप्शंस प्रीमियम टर्नओवर में भी गिरावट आई. पिछले एक साल में नियामकीय सख्ती और बड़े ट्रेडिंग फर्म्स पर कार्रवाई से बाजार की रफ्तार धीमी हुई है. अब एसटीटी में तेज बढ़ोतरी से यह सुस्ती और गहरी होने की आशंका जताई जा रही है.
सरकार के लिए आसान कमाई, बाजार के लिए चुनौती
एसटीटी सरकार के लिए कम लागत वाला और भरोसेमंद राजस्व स्रोत रहा है. चालू वित्त वर्ष में जहां इसका कलेक्शन अनुमान घटाया गया है, वहीं अगले साल बढ़े टैक्स से 10,000 करोड़ रुपये अतिरिक्त जुटाने का लक्ष्य रखा गया है. हालांकि बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ऊंचा टैक्स कारोबार को ही दबा देगा, तो यह अनुमान भी पूरा करना मुश्किल हो सकता है. कुल मिलाकर, एसटीटी बढ़ोतरी सरकार के लिए फायदे का सौदा दिखती है, लेकिन बाजार के लिए यह फिलहाल एक बड़ी चुनौती बन गई है.
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Rakesh Singh is a chief sub editor with 14 years of experience in media and publication. International affairs, Politics and agriculture are area of Interest. Many articles written by Rakesh Singh published in …और पढ़ें
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