केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने दिल्ली म्युनिसिपल कॉरपोरेशन की ओर से वसूले जाने वाले ग्रीन टैक्स को बंद करने का मुद्दा उठाया है. गडकरी ने कहा है कि जब एमसीडी इन पैसों का इस्तेमाल प्रदूषण घटाने में करता नहीं है तो उसे वसूलता क्यों है. गडकरी ने दिल्ली सरकार से तत्काल इस लेवी को बंद करने की बात कही है और सुप्रीम कोर्ट से भी फैसले की समीक्षा करने की अपील करने की बात कही है.
एमसीडी ने साल 2015 से कॉमर्शियल वाहनों से ग्रीन टैक्स वसूलना शुरू किया है.
गडकरी ने कहा कि मैंने निगम (एमसीडी) से पूछा कि आपकी ग्रीन गतिविधियों में क्या योगदान है. उन्होंने कहा कोई योगदान नहीं. तो फिर आप टोल क्यों वसूल रहे हैं? वे मुझे बता रहे हैं कि यह सुप्रीम कोर्ट का फैसला है, तब मैंने दिल्ली के मुख्यमंत्री से इसे तुरंत बंद करने का अनुरोध किया. सुप्रीम कोर्ट द्वारा पहली बार साल 2015 में लगाया गया ईसीसी एक शुल्क है, जो दिल्ली में प्रवेश करने वाले व्यावसायिक वाहनों पर वायु प्रदूषण कम करने के लिए लगाया जाता है. यह शुल्क सामान्य टोल टैक्स के अलावा लिया जाता है, जिसका मकसद प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को राजधानी में आने से रोकना और सार्वजनिक परिवहन व पैदल यात्री ढांचे को बेहतर बनाने के लिए फंड जुटाना है.
जांच में नहीं दिखा फंड का इस्तेमाल
गडकरी ने संकेत दिया कि जब उनके मंत्रालय ने फंड की जांच की तो पाया कि लेवी वसूलने के बावजूद यह पैसा वायु गुणवत्ता सुधारने के उद्देश्य के लिए इस्तेमाल नहीं हुआ. उन्होंने बताया कि एमसीडी अधिकारियों ने उन्हें बताया कि ग्रीन फीस नगर निगम के लिए आर्थिक रूप से जरूरी है. इसके जवाब में गडकरी ने सुझाव दिया कि दिल्ली सरकार निगम को 800-900 करोड़ रुपये की सहायता अनुदान के रूप में दे सकती है, ताकि लेवी जारी रखने की जरूरत न पड़े.
कोर्ट से भी हस्तक्षेप की मांग
टैक्स के कानूनी आधार का जिक्र करते हुए गडकरी ने कहा कि अधिकारियों ने इसकी निरंतरता के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला दिया. उन्होंने आगे कहा कि अब कोर्ट से भी हस्तक्षेप की मांग की है, ताकि कोर्ट इस फैसले पर पुनर्विचार कर सके और लेवी के कारण परेशान हो रहे लोगों को राहत मिल सके. अगर गडकरी की डिमांड के हिसाब से एमसीडी की लेवी बंद होती है तो कॉमर्शियल वाहन चालकों को बड़ी राहत मिलेगी.
कितनी लेवी वसूलता है एमसीडी
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद एमसीडी इनवॉयर्नमेंट कम्पेनसेशन चार्ज के रूप में ग्रीन टैक्स लेता है. हल्के कॉमर्शियल वाहनों के लिए यह लेवी लोडेड होने पर 1,400 रुपये और खाली पर 700 रुपये लगता है. ट्रक व अन्य भारी वाहनों पर लोडेड होने पर 2,600 रुपये और खाली होने पर 1,300 रुपये का ग्रीन टैक्स लगता है. इसके अलावा टैक्सी, टेम्पो व अन्य छोटे कॉमर्शियल वाहनों पर प्रति एंट्री 300 रुपये तो महीने का 3 हजार रुपये चार्ज लगता है. बस-ट्रक का 200 रुपये प्रति एंट्री तो मंथली पास 6 हजार रुपये. एमसीडी फास्टैग टोल और ईसीसी को साथ मिलाने की तैयारी कर रही है, लेकिन उससे पहले ही गडकरी ने ईसीसी बंद करने का मुद्दा उठा दिया.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें
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