नेशनल स्टॉक एक्सचेंज या एनएसई ने कहा है कि वह अपने रिस्पॉन्स टाइम को घटाकर नेनौ सेकेंड में करने वाला है. इसका मतलब है कि सेकेंड के अरबवें हिस्से में ट्रांजेक्शन पूरी की जाएगी. इससे एक्सचेंज को हर सेकेंड 10 करोड़ ट्राजेंक्शन पूरी करने में मदद मिलेगी. यह जानकारी कंपनी के एमडी व सीईओ आशीष कुमार चौहान ने दी.
फिलहाल एनएसई का रिस्पॉन्स टाइम करीब 100 माइक्रो सेकेंड है, जिसमें प्रति सेकेंड लगभग 50 से 60 लाख ट्रांजेक्शन प्रोसेस होते हैं. चौहान ने कहा कि नैनो सेकेंड लेवल पर जाने से स्पीड मौजूदा सिस्टम के मुकाबले लगभग 1000 गुना तक बढ़ जाएगी. आपको बता दें कि एक सेकेंड में 10 लाख माइक्रो सेकेंड होते हैं, जबकि नैनो सेकेंड की संख्या अरबों में होती है, जिससे ट्रेडिंग सिस्टम की क्षमता कई गुना बढ़ जाती है.
स्पीड बढ़ने के साथ बढ़ेगा साइबर रिस्क
चौहान ने यह भी चेतावनी दी कि इतनी तेज स्पीड के साथ साइबर सिक्योरिटी का खतरा भी बढ़ सकता है. उन्होंने ब्रोकर्स और टेक्नोलॉजी वेंडर्स से साइबर सिक्योरिटी फ्रेमवर्क को मजबूत बनाने पर जोर दिया. उनका कहना था कि अगर साइबर सुरक्षा में चूक हुई तो पूरा सिस्टम ठप पड़ सकता है, इसलिए सभी टेक्नोलॉजी पार्टनर्स को इसे सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी
इन्फ्रास्ट्रक्चर विस्तार और नए प्रोडक्ट्स की तैयारी
बढ़ती ट्रेडिंग डिमांड को देखते हुए एनएसई अपने को-लोकेशन इन्फ्रास्ट्रक्चर का विस्तार कर रहा है. फिलहाल एक्सचेंज के पास 2000 से ज्यादा कोलो रैक्स हैं और इसे बढ़ाकर करीब 4500 रैक्स तक ले जाने की योजना है. कोलोकेशन सर्विस के जरिए ट्रेडिंग मेंबर्स अपने सर्वर सीधे एक्सचेंज के डेटा सेंटर में रख सकते हैं, जिससे नेटवर्क लेटेंसी कम होती है और ऑर्डर एग्जिक्यूशन बेहद तेज हो जाता है. यूजर के एक्शन और सिस्टम के रिस्पॉन्स के बीच जो टाइम लगता है उसके लेटेंसी कहते हैं. यह सुविधा खास तौर पर हाई फ्रीक्वेंसी और इंस्टीट्यूशनल ट्रेडर्स के लिए अहम है.
एआई की मदद से काम होगा तेज
चौहान ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) का इस्तेमाल भी ट्रेडिंग टेक्नोलॉजी को सस्ता और ज्यादा एफिशिएंट बना सकता है. इसके अलावा एनएसई नए एसेट क्लास में भी विस्तार कर रहा है, जिसमें बिजली फ्यूचर्स और गोल्ड फ्यूचर्स जैसे प्रोडक्ट शामिल हैं. उन्होंने बताया कि कॉन्ट्रैक्ट्स फॉर डिफरेंस (CFDs) पर भी काम चल रहा है और 10 ग्राम गोल्ड फ्यूचर्स जल्द ही ट्रेडिंग के लिए उपलब्ध होंगे, जिन्हें सेबी (Sebi) से मंजूरी मिल चुकी है. यह कदम दिखाता है कि एनएसई ग्लोबल लेवल की हाई स्पीड ट्रेडिंग टेक्नोलॉजी की ओर तेजी से बढ़ रहा है और आने वाले समय में भारतीय शेयर बाजार की टेक्नोलॉजी क्षमता दुनिया के टॉप एक्सचेंजों के बराबर हो सकती है.
About the Author

जय ठाकुर 2018 से खबरों की दुनिया से जुड़े हुए हैं. 2022 से News18Hindi में सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं और बिजनेस टीम का हिस्सा हैं. बिजनेस, विशेषकर शेयर बाजार से जुड़ी खबरों में रुचि है. इसके अलावा दे…और पढ़ें
Discover more from Business News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.