भारत के ऑपरेशन सिंदूर का असर अब पाकिस्तान के स्वास्थ्य क्षेत्र में साफ नजर आने लगा है. भारत से सस्ती वैक्सीन की सप्लाई रुकते ही पाकिस्तान की पब्लिक हेल्थ व्यवस्था दबाव में आ गई है. खुद पाकिस्तान के स्वास्थ्य मंत्री ने बढ़ते खर्च और निर्भरता को लेकर चिंता जताई है. स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि पाकिस्तान को अब मदद और आत्मनिर्भरता की गुहार लगानी पड़ रही है.
भारत से वैक्सीन की सप्लाई रुकने से पाकिस्तान परेशान है.(Image:PTI)
भारत पर निर्भर थी पाकिस्तान की वैक्सीन व्यवस्था
पाकिस्तान लंबे समय से ग्लोबल एलायंस फॉर वैक्सीन एंड इम्यूनाइजेशन (GAVI) के जरिए वैक्सीन मंगाता रहा है. GAVI के तहत मिलने वाली बड़ी संख्या में वैक्सीन भारत में बनती थीं, जिससे पाकिस्तान को कम कीमत पर व्यापक टीकाकरण सुविधा मिलती थी. कोविड-19 महामारी के दौरान भी COVAX सुविधा के तहत भारत में बनी वैक्सीन पाकिस्तान तक पहुंचाई गई थीं. अब भारत से सप्लाई बाधित होने के बाद यह पूरा मॉडल डगमगा गया है.
तेजी से बढ़ता खर्च बना सबसे बड़ी चिंता
स्वास्थ्य मंत्री के मुताबिक पाकिस्तान हर साल करीब 40 करोड़ डॉलर की वैक्सीन आयात करता है, जिसमें लगभग आधा खर्च GAVI जैसे अंतरराष्ट्रीय साझेदार उठाते हैं. लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है और पाकिस्तान को कुल लागत का 51 प्रतिशत खुद वहन करना पड़ रहा है. मंत्री ने चेतावनी दी कि अगर घरेलू उत्पादन शुरू नहीं हुआ तो 2031 तक यह खर्च बढ़कर 1.2 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है. खास बात यह है कि 2031 के बाद अंतरराष्ट्रीय मदद खत्म होने की संभावना है, जिससे संकट और गहरा सकता है.
आबादी का दबाव और बढ़ती जरूरतें
करीब 24 करोड़ की आबादी वाले पाकिस्तान में हर साल लगभग 62 लाख बच्चे जन्म लेते हैं. सरकार फिलहाल 13 तरह की वैक्सीन नागरिकों को मुफ्त देती है, लेकिन एक भी वैक्सीन देश में नहीं बनती. बढ़ती जनसंख्या के कारण टीकाकरण की मांग लगातार बढ़ रही है. अब तक अंतरराष्ट्रीय सहायता इस बोझ को संभालने में मदद कर रही थी, लेकिन भारत से सप्लाई रुकने के बाद यह सहारा कमजोर पड़ता दिख रहा है.
ऑपरेशन सिंदूर के बाद बदला हालात का समीकरण
भारत ने मई 2025 में पहलगाम हमले के जवाब में ऑपरेशन सिंदूर चलाया था, जिसमें पाकिस्तान और पीओके में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया. इसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया. भले ही वैक्सीन सप्लाई सीधे तौर पर निशाने पर नहीं थी, लेकिन इस घटनाक्रम ने यह दिखा दिया कि भू-राजनीतिक टकराव का असर आम नागरिकों की सेहत तक पहुंच सकता है.
अब आत्मनिर्भरता की मजबूरी
पाकिस्तान सरकार का कहना है कि वह अब दानदाता देशों पर निर्भर रहने के बजाय खुद वैक्सीन निर्माण की दिशा में काम शुरू करेगी. स्वास्थ्य मंत्री ने संकेत दिए हैं कि देश में वैक्सीन मैन्युफैक्चरिंग क्षमता विकसित करने की तैयारी चल रही है, ताकि भविष्य में ऐसे बाहरी झटकों से बचा जा सके. हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि इसमें समय और भारी निवेश लगेगा. फिलहाल ऑपरेशन सिं दूर के बाद पैदा हुआ यह संकट पाकिस्तान के लिए एक कड़वा सबक बनकर सामने आया है.
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Rakesh Singh is a chief sub editor with 14 years of experience in media and publication. International affairs, Politics and agriculture are area of Interest. Many articles written by Rakesh Singh published in …और पढ़ें
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