भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में सरकार अब बैंकिंग सेक्टर को नई ताकत देने की तैयारी में है. बड़े प्रोजेक्ट्स और तेज आर्थिक विकास के लिए मजबूत और सक्षम बैंकों की जरूरत पर जोर दिया जा रहा है. इसी कड़ी में सरकार एक उच्चस्तरीय समिति बनाने जा रही है, जो बैंकिंग सुधारों पर सुझाव देगी. मकसद साफ है- भारतीय बैंकों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाकर ‘विकसित भारत’ को रफ्तार देना.
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि सरकार जल्द ही बैंकिंग सेक्टर में बड़े सुधार करेगी. (Image:PTI)
‘विकसित भारत’ के लिए मजबूत बैंकिंग सिस्टम की जरूरत
वित्त मंत्री ने कहा कि विकसित भारत के सपने को साकार करने के लिए बड़े पैमाने पर पूंजी और मजबूत बैंकिंग ढांचे की जरूरत है. सरकार चाहती है कि भारतीय बैंक न केवल देश के भीतर, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी प्रतिस्पर्धी बनें. प्रस्तावित समिति यह बताएगी कि बैंकों को किस तरह तैयार किया जाए, ताकि वे लंबी अवधि के विकास को फंड कर सकें और अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनें.
केवल विलय नहीं, समग्र सुधार पर फोकस
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस पहल को केवल सरकारी बैंकों के विलय तक सीमित नहीं किया जाएगा. निर्मला सीतारमण के मुताबिक, उद्देश्य यह है कि बैंक आकार और क्षमता दोनों में इतने मजबूत हों कि वे विकसित भारत की वित्तीय जरूरतों को पूरा कर सकें. इसके लिए क्रेडिट पहुंच बढ़ाना, बैंकिंग सेवाओं को आम आदमी तक ले जाना और वित्तीय समावेशन को मजबूत करना जरूरी होगा.
तेजी से फैसलों का संकेत, जल्द बनेगी समिति
वित्त मंत्री ने इस पूरी प्रक्रिया में तेजी के संकेत दिए हैं. उन्होंने कहा कि सरकार इस उच्चस्तरीय समिति का गठन जल्द से जल्द करेगी, ताकि सुधारों पर काम तुरंत शुरू किया जा सके. बजट 2026 में इस समिति की औपचारिक घोषणा की गई थी, जिससे यह साफ हो गया कि सरकार बैंकिंग सेक्टर को लेकर गंभीर और प्रतिबद्ध है.
NBFC सेक्टर में भी बड़े बदलाव की तैयारी
बजट में सिर्फ बैंकों ही नहीं, बल्कि सार्वजनिक क्षेत्र की गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) को भी अधिक मजबूत और कुशल बनाने पर जोर दिया गया है. इसके तहत पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन (PFC) और रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन कॉरपोरेशन (REC) के पुनर्गठन की बात कही गई है. सरकार का मानना है कि बड़े और सक्षम संस्थान देश के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को बेहतर तरीके से फंड कर सकते हैं.
विलय से बढ़ेगी फाइनेंसिंग क्षमता
सरकार की यह पूरी रणनीति इस ओर इशारा करती है कि आने वाले वर्षों में भारतीय बैंक और वित्तीय संस्थान आकार, ताकत और प्रभाव में वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाएंगे. यदि ये सुधार सफल रहते हैं, तो न सिर्फ अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी, बल्कि भारत का बैंकिंग सिस्टम दुनिया के बड़े बैंकों को सीधी टक्कर देने की स्थिति में आ सकता है.
About the Author
Rakesh Singh is a chief sub editor with 14 years of experience in media and publication. International affairs, Politics and agriculture are area of Interest. Many articles written by Rakesh Singh published in …और पढ़ें
Discover more from Business News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.