पाकिस्तान ने एप्पल और सैमसंग को देश में फैक्ट्री लगाने का न्योता दिया है. सरकार नई मैन्युफैक्चरिंग नीति के जरिए मोबाइल हब बनने की कोशिश कर रही है. हालांकि अभी तक दोनों कंपनियों की ओर से कोई पक्का निवेश संकेत नहीं मिला है. अब सवाल है कि क्या ये टेक दिग्गज पाकिस्तान के ऑफर को स्वीकार करेंगे.
पाकिस्तान ने एप्पल, सैमसंग को अपने यहां मोबाइल फोन बनाने का ऑफर दिया है. (Image:News18)
एप्पल और सैमसंग को औपचारिक न्योता
पाकिस्तान सरकार ने वैश्विक स्मार्टफोन कंपनियों एप्पल और सैमसंग को देश में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाने का औपचारिक निमंत्रण दिया है. यह पहल प्रस्तावित मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग फ्रेमवर्क के तहत की गई है, जिसे अभी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की मंजूरी मिलनी बाकी है. अधिकारियों के मुताबिक, सरकार चाहती है कि पाकिस्तान को मोबाइल निर्माण हब के रूप में विकसित किया जाए. हालांकि फिलहाल दोनों कंपनियों की ओर से निवेश को लेकर कोई सार्वजनिक सहमति सामने नहीं आई है.
सिर्फ निमंत्रण, अभी नहीं कोई पक्का निवेश
इंजीनियरिंग डेवलपमेंट बोर्ड के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि एप्पल और सैमसंग से संपर्क किया गया है. नए ढांचे में सस्ती जमीन, प्रदर्शन आधारित सब्सिडी और नीतिगत सहयोग जैसे प्रोत्साहन देने की बात कही गई है. लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ निमंत्रण देने से फैक्ट्रियां, रोजगार और निर्यात अपने-आप शुरू नहीं हो जाते. जब तक कंपनियां औपचारिक रूप से प्रतिबद्ध न हों, इसे महज एक प्रयास ही माना जाएगा.
कमजोर उत्पादन आधार बड़ी चुनौती
विश्लेषकों के अनुसार पाकिस्तान का मोबाइल सेक्टर फिलहाल कम मूल्य वाली असेंबली तक सीमित है. स्थानीयकरण की दर करीब 12 प्रतिशत बताई जाती है, जो भारत, वियतनाम या इंडोनेशिया जैसे देशों से काफी कम है. सरकार का दावा है कि नई नीति से पहले साल में इसे 35 प्रतिशत और आगे चलकर 50 प्रतिशत तक ले जाया जा सकता है. लेकिन विशेषज्ञ इन लक्ष्यों को महत्वाकांक्षी बताते हैं. अस्थिर बिजली आपूर्ति, कर नीतियों में बदलाव, आयात संबंधी बाधाएं और कुशल श्रमिकों की कमी जैसी समस्याएं बड़े निवेश में रुकावट बन सकती हैं.
रियायतों से आगे बढ़ने की जरूरत
नई नीति में मौजूदा योजनाओं से अधिक प्रोत्साहन देने की बात कही जा रही है. आलोचकों का कहना है कि सिर्फ सब्सिडी और रियायतें देकर वैश्विक कंपनियों को लंबे समय तक नहीं रोका जा सकता. एप्पल और सैमसंग जैसे ब्रांड आमतौर पर वहां निवेश करते हैं, जहां मजबूत सप्लाई चेन, स्थिर नियम और बेहतर लॉजिस्टिक्स मौजूद हों. पाकिस्तान को इन बुनियादी ढांचों को मजबूत करने की जरूरत है. फिलहाल यह पहल एक महत्वाकांक्षी शुरुआत जरूर है, लेकिन असली परीक्षा तब होगी जब निमंत्रण निवेश में बदलेगा.
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Rakesh Singh is a chief sub editor with 14 years of experience in media and publication. International affairs, Politics and agriculture are area of Interest. Many articles written by Rakesh Singh published in …और पढ़ें
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