Pashupatinath-Baidyanath Dham Expressway : बिहार के सड़क निर्माण मंत्री ने कहा है कि वैद्यनाथ धाम से लेकर पशुपतिनाथ तक एक्सप्रेसवे बनाने की तैयारी है. इसकी लंबाई करीब 250 किलोमीटर की होगी और दोनों शहरों के बीच आने जाने का समय भी घटकर महज 3 घंटे रह जाएगा, जो अभी 13 घंटे से भी ज्यादा लगता है.
वैद्यनाथ धाम से पशुपतिनाथ तक एक्सप्रेसवे बनाने की तैयारी है.
बिहार सरकार ने अपने बजट में वित्तवर्ष 2026-27 में सड़क निर्माण के लिए 8,260 करोड़ रुपये का आवंटन किया है. इसमें पशुपतिनाथ-वैद्यनाथ धाम हाई-स्पीड कॉरिडोर बनाने की भी तैयारी है. यह एक्सप्रेसवे काठमांडू से शुरू होगा और भारत में बिहार के सुपौल जिले से एंट्री करेगा. नेपाल में भी यह भीमनगर और बीरपुर जिलों को जोड़ेगा और दोनों देशों के बीच आवाजाही को आसान कर देगा. साथ ही आने-जाने में लगने वाला समय भी आधे से भी कम हो जाएगा.
किन-किन जिलों को जोड़ेगा एक्सप्रेसवे
यह एक्सप्रेसवे न सिर्फ भारत और नेपाल के बीच आवाजाही को आसान बनाएगा, बल्कि बिहार और झारखंड के भी कई शहरों में आना-जाना आसान हो जाएगा. बिहार के सड़क निर्माण मंत्री का कहना है कि यह एक्सप्रेसवे 250 किलोमीटर लंबा होगा, जो काठमांडू से शुरू होकर नेपाल के भीमनगर और बीरपुर जिलों को पार करते हुए बिहार के सुपौल जिले में निकलेगा. इस कॉरिडोर के रास्ते में मधेपुरा, सहरसा, खगडि़या, मुंगेर और बांका जिले भी आएंगे, जिनके बीच आवाजाही और आसान हो जाएगी. आखिर में यह एक्सप्रेसवे झारखंड के देवघर जिले में जाकर वैद्यनाथ धाम तक जुड़ेगा.
केंद्र पास भेजा प्रस्ताव
बिहार के मंत्री ने बताया कि इस एक्सप्रेसवे का प्रस्ताव बनाकर केंद्र सरकार के पास भेजा जा चुका है और वहां से हरी झंडी मिलते ही इस पर काम शुरू कर दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि इसका मकसद दोनों देशों के बीच धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ सांस्कृतिक साझेदारी को बढ़ाना भी है. इसके अलावा एक्सप्रेसवे के जरिये बिहार और झारखंड के कई जिलों में आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी में सुधार आएगा. मंत्री ने बताया कि अभी तक भारत-नेपाल बॉर्डर पर 554 किलोमीटर सड़क का निर्माण हो चुका है.
आधी रह जाएगी दूरी
अभी बाबा वैद्यनाथ धाम से पशुपतिनाथ तक की दूरी करीब 534 किलोमीटर है, जबकि एक्सप्रेसवे बनने के बाद यह दूरी सिर्फ 250 किलोमीटर की रह जाएगी. इतना ही नहीं, अभी इस दूरी को तय करने में 13 से 14 घंटे का समय लग जाता है, लेकिन एक्सप्रेसवे के बाद यह समय घटकर महज 2 से 3 घंटे का रह जाएगा. इससे न सिर्फ समय की बचत होगी, बल्कि आने-जाने में ईंधन और पैसों की बचत हो सकेगी. अगर केंद्र सरकार की मंजूरी मिल जाती है तो यह प्रोजेक्ट 5 साल से भी कम समय में पूरा हो सकेगा.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें
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