भारत की बढ़ती आयात जरूरत और अमेरिकी अवसर
पीयूष गोयल ने कहा कि भारत पहले ही दुनिया भर से करीब 300 अरब डॉलर का ऐसा सामान आयात कर रहा है, जो अमेरिका से भी लिया जा सकता है. आने वाले वर्षों में यह आयात बढ़कर 2 खरब डॉलर तक पहुंच सकता है. उन्होंने साफ कहा कि भारत में मांग की कोई कमी नहीं है, लेकिन विदेशी कंपनियों को कीमत और गुणवत्ता के मामले में प्रतिस्पर्धी होना होगा. तेजी से बढ़ती खपत, इंफ्रास्ट्रक्चर और उद्योगों का विस्तार आयात को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा.
भारत-अमेरिका ट्रेड डील का पहला चरण
भारत और अमेरिका ने हाल ही में द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण के ढांचे को अंतिम रूप दिया है. संयुक्त बयान के अनुसार, भारत ने अगले पांच वर्षों में अमेरिका से 500 अरब डॉलर के ऊर्जा उत्पाद, विमान और उनके पुर्जे, कीमती धातुएं, तकनीकी उत्पाद और कोकिंग कोल खरीदने की मंशा जताई है. यह समझौता दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों को नई मजबूती देने वाला माना जा रहा है.
पहले से मजबूत है अमेरिका से आयात
गोयल ने बताया कि भारत पहले ही अमेरिका से हर साल करीब 45 से 50 अरब डॉलर का सामान आयात करता है. यह आयात मुख्य रूप से उन क्षेत्रों में है, जहां घरेलू उत्पादन सीमित है. उन्होंने स्पष्ट किया कि 500 अरब डॉलर का लक्ष्य मौजूदा आयात को भी शामिल करता है और यह कोई नई या असामान्य बात नहीं है, बल्कि पहले से जारी प्रक्रिया का ही विस्तार है.
विमानन क्षेत्र बनेगा सबसे बड़ा चालक
वाणिज्य मंत्री ने कहा कि भारत के लिए विमानन क्षेत्र आने वाले वर्षों में सबसे बड़ा आयात चालक होगा. भारत को नए विमान, उनके इंजन और स्पेयर पार्ट्स की भारी जरूरत है. उन्होंने बताया कि केवल बोइंग से ही भारत के करीब 50 अरब डॉलर के विमान ऑर्डर पहले से मौजूद हैं, जबकि इंजनों के अलग ऑर्डर हैं. अगले पांच वर्षों में विमानन क्षेत्र में कुल ऑर्डर 80 से 90 अरब डॉलर तक पहुंच सकते हैं और यह आंकड़ा 100 अरब डॉलर से भी ऊपर जा सकता है.
स्टील उद्योग और कोकिंग कोल की बढ़ती मांग
गोयल ने स्टील उद्योग के तेज विस्तार की ओर इशारा करते हुए कहा कि जब भारत का स्टील उत्पादन 300 मिलियन टन तक पहुंचेगा, तो हर साल करीब 30 अरब डॉलर के कोकिंग कोल की जरूरत होगी. उन्होंने यह भी कहा कि कोयला और अन्य कच्चे माल का आयात कोई नई बात नहीं है और यह प्रक्रिया पहले की सरकारों के समय से चली आ रही है.
टेक्नोलॉजी, एआई और 30 ट्रिलियन डॉलर का सपना
तेजी से बढ़ती खपत के साथ भारत को उन्नत तकनीक और मशीनरी की भी बड़ी जरूरत होगी. गोयल ने डेटा सेंटर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग और क्रिटिकल मैन्युफैक्चरिंग का जिक्र करते हुए कहा कि इन क्षेत्रों में उच्च गुणवत्ता वाली मशीनरी, आईसीटी उत्पाद और एनविडिया जैसे एडवांस्ड चिप्स की मांग बढ़ेगी. उन्होंने अमेरिका को इन तकनीकों में वैश्विक नेता बताते हुए कहा कि 500 अरब डॉलर का आयात लक्ष्य उस भारत के लिए बेहद कम है, जो 30 खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य रखता है.
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