नागराजू ने कहा कि भारतीय बैंकिंग सेक्टर की स्थिति काफी अच्छी है और यह अर्थव्यवस्था की मजबूती का संकेत देती है. उन्होंने कहा कि आरबीआई (RBI) की निगरानी में बैंकों के लिए मजबूत और विवेकपूर्ण प्रबंधन प्रणाली मौजूद है, जिससे वैश्विक आर्थिक उतार चढ़ाव का असर सीमित रहने की उम्मीद है. उनके मुताबिक बैंकिंग सेक्टर देश की आर्थिक सेहत का आईना होता है और मौजूदा आंकड़े सकारात्मक तस्वीर दिखाते हैं.
लोन और डिपॉजिट ग्रोथ से दिखी मजबूती
सरकारी बैंकों की मजबूती के पीछे सबसे बड़ी वजह उनकी ऋण और जमा वृद्धि है. चालू वित्त वर्ष में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की ऋण वृद्धि करीब 12 प्रतिशत और जमा वृद्धि करीब 10 प्रतिशत रही है. इसका मतलब है कि कंपनियां और आम लोग बैंकों से ज्यादा कर्ज ले रहे हैं और ज्यादा पैसा जमा भी कर रहे हैं, जो आर्थिक गतिविधियों में तेजी का संकेत देता है.
तीन साल में मुनाफा दोगुना होने का अनुमान
नागराजू ने बताया कि चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में ही सरकारी बैंकों का संयुक्त मुनाफा करीब एक लाख करोड़ रुपये के स्तर को छू चुका है. पूरे साल में यह आंकड़ा दो लाख करोड़ रुपये पार कर सकता है. वित्त वर्ष 2022-23 में सरकारी बैंकों का मुनाफा करीब 1.05 लाख करोड़ रुपये था, यानी तीन साल में मुनाफा लगभग दोगुना होने की स्थिति बन रही है.
एनपीए में कमी और बेहतर बैलेंस शीट
पिछले कुछ सालों में सरकारी बैंकों की संपत्ति गुणवत्ता में बड़ा सुधार हुआ है. खराब कर्ज यानी एनपीए में कमी, मजबूत पूंजी पर्याप्तता अनुपात और संपत्तियों पर बेहतर रिटर्न ने बैंकों की कमाई को मजबूत किया है. यही वजह है कि सरकारी बैंक फिर से निवेशकों और बाजार के लिए भरोसेमंद बनते जा रहे हैं.
एफडीआई सीमा बढ़ाने पर सरकार का विचार
सरकार सरकारी बैंकों में विदेशी निवेश बढ़ाने पर भी विचार कर रही है. वित्त मंत्रालय सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में एफडीआई सीमा को मौजूदा 20 प्रतिशत से बढ़ाकर 49 प्रतिशत करने पर चर्चा कर रहा है. नागराजू ने कहा कि इस पर अंतर मंत्रालयी परामर्श चल रहा है और सभी संबंधित पक्षों से राय ली जा रही है. अगर एफडीआई सीमा बढ़ाई जाती है तो इससे सरकारी बैंकों को विदेशी पूंजी मिलने का रास्ता खुलेगा और उनका विस्तार तेज हो सकता है.
आम निवेशक और अर्थव्यवस्था के लिए क्या मतलब
विशेषज्ञों के मुताबिक, सरकारी बैंकों की मजबूत स्थिति भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा पॉजिटिव संकेत है. मजबूत बैंकिंग सिस्टम का मतलब है कि उद्योगों, इन्फ्रास्ट्रक्चर, एमएसएमई और आम लोगों को ज्यादा और सस्ता कर्ज मिल सकता है. इससे खपत और निवेश बढ़ता है और देश की ग्रोथ को नई रफ्तार मिलती है. जब सरकारी बैंक यानी पब्लिक सेक्टर बैंक (PSB) मुनाफा कमाते हैं, तो इसका सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था और आम आदमी की जेब पर पड़ता है. बैंक का मुनाफा सिर्फ शेयरधारकों के लिए नहीं होता, बल्कि एक सरकारी संस्थान होने के नाते यह पैसा वापस जनता के कल्याण और बैंकिंग सुविधाओं को बेहतर बनाने में लगाया जाता है. यह समझना जरूरी है कि बैंक जितना मजबूत होगा, वह आम लोगों को उतनी ही सस्ती और आसान सेवाएं देने की स्थिति में होगा. हम इस रिपोर्ट में विस्तार से जानेंगे कि बैंकों के बढ़ते मुनाफे से आपके लोन, बचत और सरकारी योजनाओं पर क्या असर पड़ता है.
(भाषा के इनपुट के साथ)
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