इस हाई-प्रोफाइल फ्रेंचाइजी का पूर्ण नियंत्रण यूनाइटेड स्पिरिट्स लिमिटेड (USL) के पास है. गौरतलब है कि यूनाइटेड स्पिरिट्स दुनिया की अग्रणी शराब निर्माता कंपनी, ब्रिटिश दिग्गज डायजियो पीएलसी (Diageo PLC) की भारतीय सहायक कंपनी है. विराट कोहली और उनकी टीम ने सालों का सूखा खत्म करते हुए पंजाब किंग्स को हराकर अपना पहला आईपीएल खिताब जीता. इस जीत ने न केवल प्रशंसकों को झूमने पर मजबूर किया, बल्कि टीम की ब्रांड वैल्यू और मूल्यांकन (Valuation) को भी नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया. खिताब जीतने के बाद से ही डायजियो को अपनी हिस्सेदारी के लिए आकर्षक बोलियां मिल रही हैं.
कौन हैं ब्लैकस्टोन और टेमासेक?
ब्लैकस्टोन दुनिया की सबसे बड़ी अल्टरनेटिव एसेट मैनेजमेंट (alternative asset management) कंपनी है, जो मुख्य रूप से प्राइवेट इक्विटी, रियल एस्टेट, क्रेडिट, इंफ्रास्ट्रक्चर और अन्य वैकल्पिक निवेशों में काम करती है. इसका असेट अंडर मैनेजमेंट करीब $1.2 ट्रिलियन है. यह बडे बड़े लेवरेज्ड बायआउट्स और ग्रोथ इन्वेस्टमेंट के लिए जानी जाती है.
टेमासेक होल्डिंग्स सिंगापुर की एक प्रमुख सॉवरेन वेल्थ फंड और ग्लोबल इन्वेस्टमेंट कंपनी है, जो सिंगापुर सरकार के स्वामित्व में है. यह लॉन्ग-टर्म, सस्टेनेबल रिटर्न्स पर फोकस करती है और दुनिया भर में कंपनियों में निवेश करती है. इसका नेट पोर्टफोलियो वैल्यू ₹27 लाख करोड़ रुपये से भी ज्यादा है. इसके भारत सहित 10 देशों में ऑफिस है.
अदार पूनावाला भी RCB खरीदने के इच्छुक
वैश्विक दिग्गजों के अलावा, भारत के सबसे धनी लोगों में शामिल सीरम इंस्टीट्यूट के अदार पूनावाला ने भी इस रेस को दिलचस्प बना दिया है. पूनावाला ने हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर घोषणा की है कि वह आरसीबी के लिए एक “मजबूत और प्रतिस्पर्धी” बोली लगाने की तैयारी कर रहे हैं. उनके अलावा JSW ग्रुप जैसे घरेलू रणनीतिक खरीदार भी कतार में हैं. अदार पूनावाला की एंट्री ने यह साफ कर दिया है कि विदेशी निवेशकों के लिए यह सौदा इतना आसान नहीं होने वाला.
यूबी ग्रुप से डायजियो तक का सफर
आरसीबी की नींव साल 2008 में रखी गई थी, जब आईपीएल के पहले सीजन के लिए टीमों की नीलामी हुई थी. उस समय ‘किंगफिशर’ के मालिक और शराब कारोबारी विजय माल्या ने यूनाइटेड ब्रुअरीज के जरिए इसे लगभग 111.6 मिलियन अमेरिकी डॉलर में खरीदा था. उस दौर में आरसीबी आईपीएल की सबसे महंगी और ग्लैमरस टीमों में से एक मानी जाती थी.
साल 2015-2016 के दौरान विजय माल्या के बढ़ते वित्तीय संकट और कानूनी विवादों के बाद टीम के मालिकाना हक में बड़ा बदलाव आया. लंदन स्थित कंपनी डायजियो ने यूनाइटेड स्पिरिट्स में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाते हुए इसका रणनीतिक नियंत्रण हासिल कर लिया. इसी प्रक्रिया के तहत आरसीबी का प्रबंधन और मालिकाना हक भी प्रभावी रूप से डायजियो के पास चला गया.
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