हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, सार्वजनिक क्षेत्र की रिफाइनरियों ने रूस से अपनी आयात मात्रा बढ़ा दी है, क्योंकि इस देश से मिलने वाली छूट अब लगभग 7 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है. यह छूट साल 2025 के मध्य में मिलने वाली छूट के स्तर से लगभग तीन गुना अधिक है. जलयानों की निगरानी करने वाले आंकड़ों और उद्योग के सूत्रों ने बताया है कि साल 2025 में भारत की प्राइवेट कंपनियां रूस से ज्यादा तेल खरीद रहीं थी, लेकिन अब यह खरीदारी सरकारी कंपनियों ने बढ़ा दी है.
इंडियन ऑयल ने कितना तेल खरीदा
सरकारी कंपनी इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी) ने जनवरी 2026 में औसतन 4,70,000 बैरल प्रतिदिन (बीपीडी) की खरीदारी की, जो इसका अब तक का उच्चतम स्तर है. दिसंबर 2025 में यह आंकड़ा 4,27,000 बीपीडी था. भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) ने इस महीने 1,64,000 बीपीडी तेल खरीदा, जो दिसंबर के 1,43,000 बीपीडी से अधिक है. रूसी तेल कंपनी रोसनेफ्ट समर्थित नयारा एनर्जी ने इस महीने लगभग 4,69,000 बीपीडी तेल खरीदा.
नायरा पूरी तरह रूसी तेल पर निर्भर
यूरोपीय संघ के प्रतिबंधों के कारण अन्य आपूर्तिकर्ताओं से कटे होने की वजह से नयारा एनर्जी पूरी तरह रूसी तेल पर निर्भर है. जनवरी के पहले तीन हफ्तों में रूसी तेल का कुल भारतीय आयात थोड़ा घटकर 11 लाख बीपीडी रह गया, जो दिसंबर में 12 लाख बीपीडी था. यह नवंबर के 18.4 लाख बीपीडी के मुकाबले काफी कम है. यह गिरावट रूस के दो सबसे बड़े तेल निर्यातकों रोसनेफ्ट और लुकोइल पर 21 नवंबर से लागू हुए अमेरिकी प्रतिबंधों के प्रभाव को दर्शाती है.
रूसी तेल से कितना पैसा बचाया
भारत ने रूस और यूक्रेन में युद्ध शुरू होने के बाद से ही रूसी तेल खरीदना शुरू किया है. साल 2022 से 2025 के बीच रूस से सस्ता क्रूड खरीदकर भारत ने अरबों डॉलर बचाए हैं. न्यूज एजेंसी रॉयर्टस के अनुसार, भारत ने अभी तक करीब 17 अरब डॉलर की बचत की है. वित्तवर्ष 2022-23 में भारत को 4.87 अरब डॉलर की बचत हुई थी, तो 2023-24 में यह बचत 5.41 अरब डॉलर रही. इसके बाद 2024-25 में अमेरिकी प्रतिबंधों की वजह से बचत 1.45 अरब डॉलर रह गई. रूस से डिस्काउंट पर तेल खरीदने की वजह से यह बचत हुई है.
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