Saharsa ward member sohan kumar Story: राजनीति के चमक-धमक वाले दौर में सहरसा के बनमा इटहरी प्रखंड से जनसेवा की एक अद्भुत तस्वीर सामने आई है. हरियाणा में कभी मजदूरी करने वाले सोहन कुमार आज वार्ड सदस्य हैं, लेकिन उनकी पहचान आज भी एक ई-रिक्शा चालक के रूप में बरकरार है. सवारी ढोने के दौरान ही वे लोगों की समस्याएं सुनते हैं. उनका समाधान करते हैं. विकास के प्रति समर्पित सोहन ने अपने वार्ड को जल-जमाव जैसी बड़ी समस्या से मुक्ति दिलाई है. उनकी यह कहानी साबित करती है कि जनसेवा के लिए बड़े पद या आलीशान दफ्तर की नहीं, बल्कि सेवा के सच्चे जज़्बे और बड़े दिल की जरूरत होती है.
सोहन कुमार की कहानी संघर्ष और सादगी की अनूठी दास्तां है. कुछ साल पहले तक वे हरियाणा में दिहाड़ी मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे. जब वे गांव लौटे तो उनकी मिलनसार छवि देखकर ग्रामीणों ने उन्हें चुनाव लड़ने के लिए प्रेरित किया. सोहन ने गांव वालों के भरोसे पर चुनाव लड़ा और पहली ही बार में वार्ड सदस्य के रूप में बड़ी जीत हासिल की. लेकिन जीत के बाद भी सोहन के पैर जमीन पर ही रहे. उन्होंने न तो अपना पुराना पेशा छोड़ा और न ही अपनी सादगी.
ई-रिक्शा जब बन जाए एंबुलेंस और दफ्तर
सोहन कुमार आज भी खुद ई-रिक्शा चलाते हैं. वे सवारी ढोते हैं और उसी दौरान अपने वार्ड के लोगों की समस्याएं भी सुनते हैं. सोहन बताते हैं कि यह ई-रिक्शा मेरी रोजी-रोटी है. इसी से घर चलता है. इसे छोड़ने का सवाल ही नहीं उठता. उनकी इस सेवा का सबसे मानवीय पहलू तब दिखता है, जब उनका ई-रिक्शा मुफ्त एंबुलेंस में तब्दील हो जाता है. रात के समय किसी की तबीयत खराब हो या किसी गर्भवती महिला को अस्पताल पहुंचाना हो, सोहन कुमार बिना एक रुपया लिए तत्काल मदद के लिए पहुंच जाते हैं.
है चलता-फिरता दफ्तर
सफर के दौरान ही लोग अपनी पेंशन, सड़क या जल-निकासी जैसी समस्याएं सोहन को बताते हैं. वे सवारी को उनकी मंजिल तक छोड़ते-छोड़ते समाधान का भरोसा भी दे देते हैं.
विकास कार्यों में भी अव्वल
सिर्फ सेवा ही नहीं सरकारी योजनाओं को धरातल पर उतारने में भी सोहन का वार्ड आगे है. सोहन बताते हैं कि उनके वार्ड की सबसे बड़ी चुनौती जल-जमाव की थी. उन्होंने इसे प्राथमिकता के आधार पर दूर कराया. जिससे आज ग्रामीणों को बड़ी राहत मिली है. अपनी इसी कार्यशैली के कारण सोहन का आत्मविश्वास भी बढ़ा है. वे मुस्कुराते हुए कहते हैं कि लोगों की सेवा करने में जो खुशी मिलती है, उसका कोई मोल नहीं. अब वार्ड में ऐसी पकड़ है कि अगली बार चुनाव में प्रचार के लिए घूमने की जरूरत नहीं पड़ेगी.
सहरसा के सोहन कुमार ने यह साबित कर दिया है कि जनसेवा करने के लिए बड़े एसी दफ्तरों या महंगी गाड़ियों की जरूरत नहीं होती. अगर दिल में सेवा का जज्बा हो, तो एक ई-रिक्शा भी बदलाव का सबसे बड़ा साधन बन सकता है. आज सोहन कुमार की कहानी सोशल मीडिया से लेकर सहरसा की गलियों तक चर्चा का विषय बनी हुई है.
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मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें
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