Hybrid ATM : इन एटीएम को बाजार, रेलवे स्टेशन, बस डिपो, अस्पताल और सरकारी दफ्तरों जैसी उन जगहों पर लगाया जाएगा जहां नकदी का इस्तेमाल ज्यादा होता है. खास बात यह है कि इन एटीएम में आप बड़े नोट डालकर छोटे नोट ले भी सकेंगे.
मिंट की एक रिपोर्ट के अनुसार, इन मशीनों को बाजार, रेलवे स्टेशन, बस डिपो, अस्पताल और सरकारी दफ्तरों जैसी उन जगहों पर लगाया जाएगा जहां नकदी का इस्तेमाल ज्यादा होता है. भले ही भारत में डिजिटल लेन-देन खूब बढ रहा है, लेकिन आज भी दिहाड़ी मजदूर, छोटे रेहड़ी-पटरी वाले और रोजाना सफर करने वाले लाखों लोग नकदी पर निर्भर हैं. उनके लिए ₹10-₹20 का छुट्टा न होना सिर्फ एक समस्या नहीं, बल्कि उनकी आजीविका में रुकावट बन जाता है.
मुंबई में शुरू हुआ पायलट प्रोजेक्ट
यह केवल कागजी योजना नहीं है. मुंबई में एक पायलट प्रोजेक्ट के जरिए इसकी व्यावहारिकता परखी जा रही है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) भी इस दिशा में सक्रिय है और छोटे नोटों की छपाई बढ़ाने पर विचार कर रहा है ताकि मशीनों में कैश की कमी न हो. यह पहल नकदी को खत्म करने के लिए नहीं, बल्कि उसे स्मार्ट तरीके से सर्कुलेशन में लाने के लिए है.
हालांकि, इस योजना के सामने कुछ चुनौतियां भी हैं. क्या बैंक इन मशीनों के रख-रखाव और सुरक्षा के खर्च को उठाने के लिए तैयार होंगे? क्या सिर्फ मशीनें लगा देने से नोटों की आपूर्ति का असंतुलन खत्म हो जाएगा? एक तरफ जहां UPI और डिजिटल पेमेंट ने क्रांति ला दी है, वहीं दूसरी तरफ नकदी की यह ‘हाइब्रिड’ व्यवस्था उन लोगों के लिए सेतु का काम करेगी जो आज भी कैश को प्राथमिकता देते हैं.
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