Rupee All-time Low: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच पहली बार एक डॉलर की कीमत 92.30 रुपये के ऑल टाइम लो पर पहुंच गई है. इससे पहले रुपए का सबसे निचला स्तर 91.87 रुपये था.
(फोटो- आईएएनएस)
क्यों गिर रहा है रुपया?
एनालिस्ट के मुताबिक, मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव से महंगाई बढ़ने और व्यापार घाटा बढ़ने की आशंका है. साथ ही विदेशी निवेशक उभरती अर्थव्यवस्थाओं से पैसा निकाल सकते हैं, जिससे रुपए पर दबाव बढ़ता है.
कच्चे तेल ने बढ़ाई चिंता
तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में 2020 के बाद सबसे बड़ी तेजी आई है. बीते दो दिनों में तेल करीब 12-13% महंगा होकर 82 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है. भारत अपनी जरूरत का लगभग 80 फीसदी कच्चा तेल आयात करता है. ऐसे में तेल की कीमत बढ़ने से देश का आयात बिल बढ़ जाता है. रिपोर्ट्स के अनुसार, कच्चे तेल की कीमत में हर 1 डॉलर की बढ़ोतरी से भारत का आयात बिल करीब 2 अरब डॉलर बढ़ सकता है.
बाजार और आरबीआई पर नजर
एनालिस्ट ने आयातकों को सलाह दी है कि वे डॉलर खरीदने में जल्दबाजी न करें और गिरावट का इंतजार करें. साथ ही भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की संभावित कार्रवाई पर नजर बनाए रखें.
क्या कहती है रिपोर्ट?
बजाज फिनसर्व एएमसी की हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि घरेलू स्तर पर विकास और महंगाई का माहौल संतुलित होने के बावजूद, अमेरिकी टैरिफ, बढ़ती जियो-पॉलिटिकल चिंताएं और लगातार विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) की निकासी ने रुपए को रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा दिया है. हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील की घोषणा के बाद बाजार की भावना में कुछ सुधार देखा गया है.
आगे क्या?
तेल और गैस सुविधाओं पर ईरान के जवाबी हमलों और होर्मुज जलडमरूमध्य में शिपिंग रोकने की धमकी से ग्लोबल सप्लाई पर असर पड़ सकता है. अगर तेल महंगा बना रहता है, तो भारत में महंगाई और बढ़ सकती है और रुपए पर दबाव जारी रह सकता है.
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प्रिंट मीडिया से करियर की शुरुआत करने के बाद पिछले 8 सालों से News18Hindi में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर कार्यरत हैं. लगभग 4 सालों से बिजनेस न्यूज टीम का हिस्सा हैं. मीडिया में करीब डेढ़ दशक का अनुभव रखते हैं. बिजन…और पढ़ें
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