ब्याज दरों में कटौती का मतलब हमेशा सस्ती EMI नहीं होता. कई बार बैंक आपकी सुविधा के नाम पर लोन की अवधि बढ़ाकर आपसे ज्यादा पैसा वसूल लेते हैं. जागरूक रहें और बैंक के विज्ञापनों के बजाय अपने लोन के कागजों पर नजर रखें.
EMI कम न होने के मुख्य कारण:
रीसेट डेट का चक्कर:
ज्यादातर लोन बाहरी बेंचमार्क से जुड़े होते हैं, लेकिन उनका रीसेट एक तय समय (जैसे हर 6 महीने या 1 साल) पर होता है. अगर दरों में कटौती पिछले महीने हुई है और आपके लोन की ‘रीसेट डेट’ तीन महीने बाद है, तो तब तक आपकी EMI पुरानी (ऊंची) दरों पर ही चलती रहेगी.
बैंक का ‘टेन्योर’ वाला खेल
जब ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो बैंक आपकी EMI बढ़ाने के बजाय लोन की टेन्योर बढ़ा देते हैं. लेकिन जब दरें गिरती हैं, तो बैंक अक्सर उस बढ़ी हुई अवधि को ही बरकरार रखते हैं. नतीजा यह होता है कि आप कम ब्याज दर पर ज्यादा लंबे समय तक भुगतान करते रहते हैं, जिससे बैंक को ज्यादा फायदा होता है.
पुराने बेंचमार्क (MCLR/Base Rate)
अगर आपका लोन पुराना है और वह MCLR या बेस रेट से जुड़ा है, तो ब्याज दरों में कटौती का फायदा आप तक बहुत धीरे-धीरे और कम पहुंचता है. नए ‘एक्सटर्नल बेंचमार्क’ (EBLR) वाले लोन में फायदा ज्यादा जल्दी मिलता है.
शुरुआती सालों का बोझ
लोन के शुरुआती सालों में आपकी EMI का बड़ा हिस्सा सिर्फ ब्याज चुकाने में जाता है. अगर इस दौरान दरें बढ़ी थीं, तो आपके मूलधन में बहुत कम कमी आई होगी. इस कारण बाद में रेट कट होने पर भी EMI में बड़ा बदलाव महसूस नहीं होता.
बॉरोअर क्या करें?
- शेड्यूल चेक करें: बैंक से अपना नया ‘एमोर्टाइजेशन शेड्यूल’ मांगें. देखें कि लोन कितने साल बढ़ गया है.
- प्री-पेमेंट है सबसे कारगर: रेट कट होने पर अगर आप थोड़ा सा भी अतिरिक्त भुगतान कर देते हैं, तो वह सीधा आपके मूलधन को कम करता है और लोन जल्दी खत्म होता है.
- लोन स्विच करें: अगर आपका लोन पुराने रेट सिस्टम (MCLR) पर है, तो इसे नए सिस्टम (EBLR) पर स्विच करने के बारे में बैंक से बात करें.
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प्रिंट मीडिया से करियर की शुरुआत करने के बाद पिछले 8 सालों से News18Hindi में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर कार्यरत हैं. लगभग 4 सालों से बिजनेस न्यूज टीम का हिस्सा हैं. मीडिया में करीब डेढ़ दशक का अनुभव रखते हैं. बिजन…और पढ़ें
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