Crude oil : अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण खाड़ी देशों से कच्चे तेल की आवक बाधित हुई है लेकिन रूस से सप्लाई बढ़ गई है. इससे भारत को अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में आसानी हुई है.
रूसी कच्चे तेल की एक बड़ी खेप इस समय समुद्र में है और तेजी से भारतीय बंदरगाहों की ओर बढ़ रही है.
होर्मुज जलडमरूमध्य संकट का असर यह हुआ है कि फरवरी में जो सऊदी अरब भारत का दूसरा सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता था, मार्च के पहले 11 दिनों में उसकी आपूर्ति घटकर महज 0.4 लाख बैरल प्रतिदिन गई है. इराक से भी केवल 0.6 लाख बैरल प्रतिदिन तेल ही भारत पहुंच सका है. ऐसे में भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए रूसी तेल की ओर रुख किया है.
समुद्र में है रूसी खेप
टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, केप्लर के लीड एनालिस्ट सुमित रितोलिया का कहना है कि अमेरिका द्वारा रूसी तेल पर नरमी दिखाए जाने के बाद भारत अपने पुराने आधार स्तर से कहीं अधिक मात्रा में रूस से तेल आयात कर रहा है. रूसी कच्चे तेल की एक बड़ी खेप इस समय समुद्र में है और तेजी से भारतीय बंदरगाहों की ओर बढ़ रही है.
फरवरी से कम आयात
फरवरी में भारत ने लगभग 5.2 लाख बैरल कच्चे तेल का आयात किया था, जो मार्च में घटकर 4.5 लाख बैरल स्तर पर आ गया है. भले ही कुल आयात में कमी आई हो, लेकिन इसमें रूस की हिस्सेदारी बढ़ी है. विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले हफ्तों में कुल आयात संख्या और घट सकती है, क्योंकि वर्तमान में जो जहाज भारत पहुंच रहे हैं, वे संघर्ष शुरू होने से पहले ही रवाना हो चुके थे.
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