Russian Oil Price : अमेरिका ने भारत को भले ही रूस से क्रूड ऑयल खरीदने की छूट दे दी है, लेकिन इस बार रूसी तेल महंगा बिक रहा है. रॉयटर्स ने आशंका जताई है कि रूसी तेल व्यापारियों की ढुलाई लागत बढ़ने की वजह से कच्चे तेल की कीमतों में भी उछाल आ सकता है. साथ ही ईरान युद्ध के कारण रूसी तेल की डिमांड भी बढ़ गई है. हालांकि, भारत को अब भी ब्रेंट के मुकाबले रूसी तेल काफी कम कीमत पर मिलने की संभावना है.
रूसी तेल की डिमांड बढ़ने से इसकी कीमतों में भी उछाल दिख रहा है.
अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच एक हफ्ते पहले शुरू हुए युद्ध ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है, जो वैश्विक तेल का मुख्य मार्ग है. इससे पहले रूस-यूक्रेन युद्ध की शुरुआत के बाद से रूसी तेल भारतीय बंदरगाहों पर ब्रेंट के मुकाबले कई अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल की छूट पर बिक रहा था, क्योंकि यूरोपीय संघ द्वारा रूसी तेल पर प्रतिबंध लगाने के बाद रूस ने अपनी बिक्री एशिया की ओर मोड़ दी थी. हाल के वर्षों में भारतीय रिफाइनरियों ने कच्चे तेल के लिए रूसी तेल पर निर्भरता बढ़ाई थी.
अब क्या है रूस की रणनीति
बदलते हालात के बाद क्रेमलिन ने कहा है कि ईरान युद्ध के चलते रूसी तेल और गैस की मांग में जबरदस्त इजाफा हुआ है. व्यापारियों ने बताया कि मार्च और अप्रैल की शुरुआत में भारतीय बंदरगाहों पर डिलीवरी के समय रूसी उरल्स तेल ब्रेंट के मुकाबले 4 से 5 डॉलर प्रति बैरल के प्रीमियम पर बेचा जा रहा है. फिलहाल अमेरिका ने भारतीय रिफाइनरियों को रूसी तेल खरीदने की छूट दी है, जिसके बाद भारतीय कंपनियों ने करीब 2 करोड़ बैरल तेल खरीद भी लिया है.
क्यों महंगा हो रहा रूसी तेल
बाल्टिक सागर के प्रिमोर्स्क बंदरगाह पर ब्रेंट के मुकाबले रूस के उरल्स तेल की छूट लगभग 5 डॉलर घटकर 20 डॉलर प्रति बैरल रह गई है. पिछले हफ्ते ब्रेंट की कीमतें 25% बढ़कर 89 डॉलर प्रति बैरल हो गईं, जबकि रूसी उरल्स तेल की कीमतें 50% बढ़कर 45.7 डॉलर से 68.6 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गईं. एलएसईजी के आंकड़ों के मुताबिक, उरल्स तेल अब पहली बार पिछले साल जुलाई के बाद लोडिंग पोर्ट पर जी7 के 60 डॉलर प्रति बैरल के प्राइस कैप से ऊपर और यूरोपीय संघ के नए 44.10 डॉलर प्रति बैरल के प्राइस कैप से भी ऊपर बिक रहा है. आपको बता दें कि जी7 और ईयू दोनों ने रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद ये प्राइस कैप लगाए थे, जिससे तय सीमा से ऊपर रूसी तेल बेचने वालों को पश्चिमी शिपिंग और बीमा सेवाएं नहीं मिलतीं.
लागत बढ़ने से कम हो रहा मुनाफा
रूसी तेल विक्रेताओं का मुनाफा बढ़ती मालभाड़ा लागत के कारण कम हो जाएगा, क्योंकि रूसी बाल्टिक बंदरगाहों से भारत तक तेल ले जाने के लिए करीब 1 लाख मीट्रिक टन क्षमता वाले अफ्रामैक्स जहाज को किराये पर लेने में लगभग 1.5 करोड़ डॉलर का खर्च आ रहा है. फरवरी में यह खर्च करीब 1 करोड़ से 1.2 करोड़ डॉलर था. व्यापारियों के मुताबिक, रूसी काले सागर के नोवोरोसिस्क बंदरगाह से माल लोडिंग का मालभाड़ा बाल्टिक बंदरगाहों की तुलना में कम है, जो 1.3 करोड़ डॉलर है. यह बंदरगाह हाल ही में ड्रोन हमले के बाद शुक्रवार को फिर से शुरू हुआ है. नोवोरोसिस्क से भारत के लिए एफओबी आधार पर रूसी उरल्स तेल की छूट ब्रेंट के मुकाबले 14 डॉलर प्रति बैरल हो गई है, जो हाल की तुलना में 10 डॉलर प्रति बैरल ज्यादा है.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें
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