एसएंडपी ग्लोबल एनर्जी ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध बढ़ता है, तो यह कच्चे तेल की सप्लाई में इतिहास की सबसे बड़ी रुकावट बन सकता है. ईरान का होर्मुज स्ट्रेट पर मजबूत नियंत्रण है, जहां से रोजाना करीब 20 मिलियन बैरल तेल गुजरता है, और अगर यह मार्ग बाधित होता है तो वैश्विक तेल कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं और सप्लाई में भारी कमी आ सकती है. भारत, जोकि दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है और जिसकी अधिकांश तेल जरूरत मिडिल ईस्ट से पूरी होती है, तो ऐसे में ये स्थिति और भी गंभीर हो सकती है क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट बंद होने पर तेल की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है.
अगर युद्ध की वजह से यह रास्ता बंद हो गया तो तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं और कई देशों में तेल की कमी हो सकती है. भारत के लिए यह खबर बहुत बड़ी है क्योंकि हमारा देश दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है. हमारी ज्यादातर तेल की जरूरत मिडिल ईस्ट से पूरी होती है. अगर होर्मुज स्ट्रेट बंद हुआ तो भारत को तेल मिलना मुश्किल हो जाएगा.
यूरोप से लेकर अमेरिका तक पर होगा असर
इससे पेट्रोल और डीजल के दाम बहुत तेजी से बढ़ सकते हैं. आम आदमी की जेब पर बोझ पड़ेगा और महंगाई भी बढ़ेगी. एस एंड पी ग्लोबल ने कहा कि यह टेंशन पहले के किसी भी युद्ध या संकट से बड़ा होगा. कंपनी ने अनुमान लगाया कि अगर युद्ध लंबा चला तो तेल की कीमतें 100 डॉलर से भी ज्यादा जा सकती हैं और कई महीनों तक ऊंची रह सकती हैं. इससे न सिर्फ भारत बल्कि यूरोप, एशिया और अमेरिका भी प्रभावित होंगे.
होर्मुज स्ट्रेट पर मंडरा रहा खतरा
अभी ईरान और इजराइल के बीच तनाव बहुत ज्यादा बढ़ गया है. अमेरिका ने इजराइल का साथ दिया है और ईरान पर हमले किए हैं. ईरान ने भी जवाबी हमले किए हैं. ऐसे में होर्मुज स्ट्रेट पर खतरा मंडरा रहा है. ईरान ने पहले भी कहा है कि अगर उस पर बड़ा हमला हुआ तो वह इस स्ट्रेट को बंद कर देगा. एस एंड पी ग्लोबल का कहना है कि इतिहास में ऐसा कोई संकट नहीं आया है जहां इतनी बड़ी मात्रा में तेल की सप्लाई एक साथ रुक जाए. पहले 1973 का तेल संकट था लेकिन उसमें भी इतना बड़ा असर नहीं हुआ जितना अब हो सकता है. कंपनी ने चेतावनी दी है कि दुनिया को इस संभावना के लिए तैयार रहना चाहिए.
मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार, भारत सरकार और तेल कंपनियां इस स्थिति पर नजर रख रही हैं. पहले से ही रूस से ज्यादा तेल खरीदना शुरू किया गया है ताकि मिडिल ईस्ट पर निर्भरता कम हो. लेकिन रूस से आने वाला तेल भी महंगा हो सकता है अगर वैश्विक कीमतें बढ़ीं. एस एंड पी ग्लोबल ने कहा कि अगर युद्ध हुआ तो शिपिंग कंपनियां भी डर जाएंगी और इंश्योरेंस कंपनियां प्रीमियम बहुत बढ़ा देंगी. इससे तेल का ट्रांसपोर्टेशन महंगा हो जाएगा. भारत जैसे देशों के लिए यह और भी मुश्किल होगी क्योंकि हमारा ज्यादातर तेल समुद्र के रास्ते आता है.
यह चेतावनी बहुत गंभीर मानी जा रही है. अगर अमेरिका और ईरान का टकराव बढ़ा तो तेल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकती हैं. भारत में पेट्रोल-डीजल महंगा होने से ट्रांसपोर्ट, खेती और रोजमर्रा की चीजों पर असर पड़ेगा. लोग कह रहे हैं कि सरकार को अब और ज्यादा तैयारी करनी चाहिए. वैकल्पिक स्रोत ढूंढने चाहिए और स्टॉक बढ़ाना चाहिए. एस एंड पी ग्लोबल की यह रिपोर्ट निवेशकों और आम लोगों दोनों के लिए चिंता की बात है. उम्मीद है कि बातचीत से यह संकट टल जाए लेकिन अभी जो स्थिति है वह काफी खतरनाक लग रही है.
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