रिटायरमेंट के लिए पैसा जोड़ना कई लोगों के लिए मुश्किल काम होता है, क्योंकि समय के साथ निवेश का तरीका बदलना पड़ता है. इसी को आसान बनाने के लिए बाजार नियामक ने लाइफ साइकिल फंड की नई श्रेणी शुरू की है. इन फंड की खास बात यह है कि निवेशक की उम्र या रिटायरमेंट के समय के हिसाब से इसमें अपने आप बदलाव होता रहता है. शुरुआत में ज्यादा पैसा इक्विटी में लगता है और रिटायरमेंट करीब आने पर धीरे धीरे सुरक्षित निवेश में शिफ्ट हो जाता है.
इन फंड्स द्वारा अलग-अलग सेक्टर्स के शेयरों में निवेश किया जाता है.
लाइफ साइकिल फंड ऐसे म्यूचुअल फंड होते हैं जिनमें निवेश का बंटवारा निवेशक की उम्र या रिटायरमेंट तक बचे समय के हिसाब से बदलता रहता है. जब निवेशक युवा होता है तब फंड में इक्विटी का हिस्सा ज्यादा रखा जाता है ताकि लंबे समय में ज्यादा रिटर्न मिलने की संभावना रहे. जैसे जैसे रिटायरमेंट का समय करीब आता है, फंड धीरे धीरे इक्विटी का हिस्सा कम करके डेट जैसे अपेक्षाकृत सुरक्षित निवेश में पैसा बढ़ाने लगता है. इससे बाजार की अचानक गिरावट से रिटायरमेंट फंड को बचाने की कोशिश की जाती है.
दो तरह के फंड लॉन्च करने की अनुमति
नियामक ने एसेट मैनेजमेंट कंपनियों को दो तरह के लाइफ साइकिल फंड लॉन्च करने की अनुमति दी है. पहला है टारगेट मैच्योरिटी लाइफ साइकिल फंड. इसमें एक तय मैच्योरिटी साल होता है जो निवेशक के रिटायरमेंट के साल के आसपास रखा जाता है. दूसरा है टारगेट डेट लाइफ साइकिल फंड. इसमें रिटायरमेंट की तय तारीख के करीब आने के साथ साथ इक्विटी का हिस्सा धीरे धीरे कम किया जाता है.
कैसे बदलता है निवेश का संतुलन
इन फंड में एक तय फॉर्मूला होता है जिसे ग्लाइड पाथ कहा जाता है. इसी के आधार पर समय के साथ इक्विटी और डेट का अनुपात बदला जाता है. उदाहरण के तौर पर अगर कोई निवेशक 25 साल की उम्र में निवेश शुरू करता है तो शुरुआत में करीब 80 से 90 प्रतिशत पैसा इक्विटी में लगाया जा सकता है. वहीं जब वही निवेशक 60 साल के करीब पहुंचता है तो इक्विटी का हिस्सा घटकर लगभग 20 से 30 प्रतिशत रह जाता है.
निवेशकों के लिए क्यों फायदेमंद
लाइफ साइकिल फंड का सबसे बड़ा फायदा यह है कि निवेशक को बार बार पोर्टफोलियो बदलने की जरूरत नहीं पड़ती. फंड मैनेजर अपने आप समय के हिसाब से निवेश का संतुलन बदल देता है. दूसरा फायदा यह है कि बाजार गिरने पर घबराकर गलत फैसले लेने की संभावना कम हो जाती है. चूंकि फंड पहले से तय रणनीति के अनुसार चलता है, इसलिए निवेश अधिक अनुशासित तरीके से होता है.
किन लोगों के लिए बेहतर विकल्प
यह फंड खास तौर पर उन लोगों के लिए उपयोगी माने जा रहे हैं जो रिटायरमेंट के लिए लंबी अवधि का निवेश करना चाहते हैं लेकिन बाजार पर लगातार नजर नहीं रख सकते. हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशकों को ऐसा फंड चुनना चाहिए जिसका ग्लाइड पाथ उनकी जोखिम उठाने की क्षमता और रिटायरमेंट की समयसीमा के मुताबिक हो. साथ ही यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि इक्विटी में निवेश होने की वजह से बाजार का जोखिम पूरी तरह खत्म नहीं होता.
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जय ठाकुर 2018 से खबरों की दुनिया से जुड़े हुए हैं. 2022 से News18Hindi में सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं और बिजनेस टीम का हिस्सा हैं. बिजनेस, विशेषकर शेयर बाजार से जुड़ी खबरों में रुचि है. इसके अलावा दे…और पढ़ें
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