ब्रोकर और उनकी कंपनियों के लिए राहत भरी खबर है. सेबी के नए नियम से अब सिर्फ FIR दर्ज होने या चार्जशीट दाखिल होने पर उन्हें अपने पद से हटा नहीं जाएगा.
नियमों में बदलाव के तहत अब FIR या चार्जशीट दाखिल होना किसी भी ब्रोकर की डिसक्वालिफिकेशन प्रक्रिया की शुरुआत नहीं मानी जाएगी. सेबी ने साप किया कि FIR या चार्जशीट केवल कानूनी प्रक्रिया का पहला कदम हैं. किसी को दोषी साबित किए बिना पद से हटाना सही नहीं होगा. नए प्रस्ताव के अनुसार, ब्रोकर या कंपनी केवल तभी डिसक्वालिफाई होगी जब कोर्ट में उनका दोष साबित हो.
शेयर होल्डिंग के अधिकारों को लेकर भी बदलाव
इसके साथ ही SEBI ने शेयर होल्डिंग के अधिकारों को लेकर भी बदलाव किया है. अगर किसी व्यक्ति को ‘फिट और प्रॉपर’ नहीं माना जाता है, तो उसे अपने शेयर बेचने की आवश्यकता नहीं होगी. केवल वोटिंग अधिकार रोके जाएंगे. इसका मतलब यह है कि इकोनॉमिक ओनरशिप बनी रहेगी, लेकिन कंपनी के फैसले लेने में उसका प्रभाव कम हो जाएगा.
सुनवाई का मौका देगा सेबी
नियमों में सुनवाई का पूरा हक भी दिया गया है. किसी भी ब्रोकर या कंपनी को ‘फिट और प्रॉपर’ न मानने से पहले SEBI सुनवाई का मौका देगा. इसके लिए ब्रोकर को 7 दिन के भीतर किसी भी संभावित डिसक्वालिफिकेशन इवेंट की जानकारी SEBI को देनी होगीय. पुराने नियमों में डिसक्वालिफिकेशन के बाद नए रजिस्ट्रेशन पर 5 साल का प्रतिबंध था, जबकि अब SEBI स्पष्ट समय अवधि तय करेगा. साथ ही, ‘शो-कार्ड नोटिस’ के बाद ठंडा होने की अवधि भी घटाकर एक साल से छह महीने कर दी गई है.
ब्रोकर इंडस्ट्री की चिंताओं को ध्यान में रखकर बदलाव
सेबी का कहना है कि यह बदलाव ब्रोकर इंडस्ट्री की चिंताओं और पिछले 4-5 सालों के अनुभव को ध्यान में रखकर किया गया है. इन प्रस्तावित नियमों पर जनता और उद्योग से सुझाव 25 फरवरी तक मांगे गए हैं. इस कदम से ब्रोकर इंडस्ट्री को कानूनी स्पष्टता और स्थिरता मिलने की उम्मीद है, जबकि निवेशकों के हितों की सुरक्षा भी बनी रहेगी.
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प्रिंट मीडिया से करियर की शुरुआत करने के बाद पिछले 8 सालों से News18Hindi में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर कार्यरत हैं. लगभग 4 सालों से बिजनेस न्यूज टीम का हिस्सा हैं. मीडिया में करीब डेढ़ दशक का अनुभव रखते हैं. बिजन…और पढ़ें
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