अमेरिका के साथ ट्रेड डील की अब तक डिटेल्स तो सामने नहीं आई हैं, लेकिन शुरुआती संकेत बता रहे हैं कि जब किसानों की बात आई तो पीएम मोदी अड़ गए. साफ कह दिया, जहां जहां किसानों की बात है, उसे ट्रेड डील से बाहर कर दीजिए, उस पर कोई बात नहीं होगी. रॉयटर्स ने मामले से जुड़े अधिकारियों से बातचीत के बाद यह रिपोर्ट दी है. अफसरों ने साफ किया है भारत अमेरिका को अपने कृषि बाजार में केवल सीमित पहुंच ही देगा. वो चीजें आएंगी, जो ऑलरेडी भारत दुनिया के अन्य देशों से मंगाता है.
इसे सवाल-जवाब से समझिए
क्या भारत अमेरिकी मक्का, सोयाबीन या सोयामील पर टैरिफ कम करेगा?
सोया तेल पर भी अमेरिका को ना क्यों?
भारत के पास मक्का और सोयामील का बड़ा भंडार मौजूद है. हालांकि, भारत सोया तेल का दुनिया का सबसे बड़ा आयातक है. मुख्य रूप से ब्राजील, अर्जेंटीना और अमेरिका से भारत सोया तेल मंगाता है. लेकिन सोयाबीन बाहर से नहीं मंगाता. थोड़ा बहुत अफ्रीका से आयात किया जाता है, क्योंकि वहां गैर-जीएम तिलहन का उत्पादन होता है.
क्या चावल- मक्का मंगाएगा भारत?
अधिकारियों का कहना है कि भारत मक्का, चावल और गन्ने से इथेनॉल बनाता है. इसलिए, इथेनॉल प्रोडक्शन के लिए उसे न तो चावल चाहिए और ना ही मक्का. इसलिए इस बाजार में भी अमेरिका को मना कर दिया गया है.
तो क्या भारत ने डेयरी सेक्टर में कुछ जगह दी?
अफसरों का कहना है कि अमेरिका भारत के डेयरी बाजार तक अधिक पहुंच के लिए काफी जोर लगा रहा था. क्योंकि अभी बाहर के डेयरी प्रोडक्ट पर भारत में भारी भरकम टैक्स है. अमेरिका चाहता था कि यह टैक्स कम कर दिया जाए. लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसानों का हित देखते हुए साफ कह दिया कि इसे तो बातचीत से ही बाहर रखिए. इस पर कोई बातचीत ही नहीं हो सकती. भारत ने साफ कह दिया कि हमारे यहां तो एक किसान के पास केवल दो-तीन जानवर होते हैं, जबकि अमेरिका के पास सैकड़ों होते हैं. अगर हमने उनके लिए राह खोली तो भारतीय किसानों को नुकसान होगा.
कृषि क्षेत्र में भारत और कहां रियायत दे सकता है?
अमेरिका आखिर क्यों हो रहा खुश?
अमेरिका सिर्फ इस बात से खुश हो सकता है कि उसे भारतीय बाजार तक अमेरिकी किसानों द्वारा उगाए गए बादाम, अखरोट, पिस्ता, सेब, नाशपाती और बेरीज की पहुंच उसने आसान कर दी. ट्रंप इसे एक बड़ी जीत के रूप में प्रचारित कर सकते हैं. ऐसा नजर भी आया, जब वहां के कृषिमंत्री ने ट्रंप को खुलकर इसके लिए बधाई दी. लेकिन भारत को इससे कोई नुकसान नहीं.
भारत के लिए कृषि संवेदनशील मुद्दा क्यों?
कृषि क्षेत्र देश की 1.4 अरब आबादी के लगभग आधे हिस्से का भरण-पोषण करता है. भारत के लगभग 80% किसान छोटे जोतदार हैं, जिनके पास दो हेक्टेयर या उससे कम जमीन है, जिससे उनकी आय सीमित रहती है. लेकिन किसान एक प्रभावशाली वोटिंग ब्लॉक (मतदाता समूह) बनाते हैं, और पिछली सरकारों ने भी लाखों उत्पादकों को नाराज करने से बचने की कोशिश की है.
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