भारत सरकार की 30 मई 2019 की अधिसूचना के अनुसार, सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) को जारी होने की तारीख से 5 साल बाद समय से पहले प्रीमैच्योर रिडेम्प्शन किया जा सकता है, बशर्ते वह तारीख ब्याज भुगतान की तारीख हो. SGB 2019–20 सीरीज II को 16 जनवरी 2019 को जारी किया गया था, इसलिए 16 जनवरी 2026 को इसे समय से पहले जल्दी एक्जिट का मौका मिला है.
SGB 2019–20 सीरीज II का रिडेम्प्शन प्राइस
RBI ने इस सीरीज के लिए प्रीमैच्योर रिडेम्प्शन प्राइस ₹14,092 प्रति यूनिट तय किया है. बता दें कि यह बॉन्ड जारी होते समय ₹3,393 प्रति यूनिट की कीमत पर मिला था.
रिडेम्प्शन प्राइस कैसे तय किया गया?
रिडेम्प्शन की कीमत 999 शुद्धता वाले सोने के दाम के आधार पर तय की जाती है. इसके लिए पिछले तीन कारोबारी दिनों का औसत लिया जाता है, जो इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) द्वारा जारी क्लोजिंग प्राइस पर आधारित होता है.
इस मामले में 12, 13 और 14 जनवरी 2026 के सोने के भाव को जोड़कर औसत निकाला गया, जिसके आधार पर यह रिडेम्प्शन वैल्यू तय की गई है. रिडेम्प्शन की रकम सीधे निवेशक के रजिस्टर्ड बैंक अकाउंट में ट्रांसफर की जाएगी.
निवेशकों को कितना फायदा हुआ?
SGB 2019–20 सीरीज II का प्रीमैच्योर रिडेम्प्शन प्राइस ₹14,092 प्रति यूनिट तय किया गया है. यह उन निवेशकों के लिए जबरदस्त मुनाफा है, जिन्होंने यह बॉन्ड जारी होने के समय ₹3,393 प्रति यूनिट के भाव पर खरीदा था.
इसका मतलब है कि सिर्फ सोने की कीमत बढ़ने से ही निवेशकों को करीब ₹10,700 प्रति यूनिट का फायदा हुआ है, यानी लगभग 315% से ज्यादा का रिटर्न. इतना ही नहीं, SGB पर मिलने वाला 2.5% सालाना ब्याज (जो हर छह महीने में मिलता है) भी निवेशकों की कमाई को और बढ़ाता है.
उदाहरण से समझिए
अगर किसी निवेशक ने इस SGB में शुरुआत में ₹1 लाख का निवेश किया था, तो प्रीमैच्योर रिडेम्प्शन पर उसे ₹4.1 लाख से ज्यादा मिलेंगे. यह रकम ब्याज से हुई कमाई के अलावा है.प्रीमैच्योर रिडेम्प्शन कैसे काम करता है
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) की कुल अवधि 8 साल होती है, लेकिन निवेशक 5 साल पूरे होने के बाद समय से पहले बाहर निकल सकते हैं. ध्यान रहे कि प्रीमैच्योर रिडेम्प्शन सिर्फ उन्हीं तारीखों पर संभव होता है, जब 6 महीने का ब्याज दिया जाता है.
इसके लिए निवेशक को उस बैंक, पोस्ट ऑफिस या एजेंट के जरिए आवेदन करना होता है, जहां से बॉन्ड खरीदा गया था. आमतौर पर इसके लिए कुछ दिन पहले अनुरोध देना पड़ता है.
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) स्कीम क्या है?
SGB स्कीम को भारत सरकार ने नवंबर 2015 में शुरू किया था. यह योजना फिजिकल गोल्ड के विकल्प के तौर पर लाई गई थी. इन बॉन्ड्स को RBI केंद्र सरकार की ओर से जारी करता है. ये बॉन्ड ग्राम में सोने के नाम पर जारी होते हैं और निवेशकों को दो फायदे देते हैं- पहला है 2.5% सालाना तय ब्याज, दूसरा है सोने की कीमत बढ़ने से कैपिटल गेन. इस स्कीम का मकसद भारत में फिजिकल गोल्ड की मांग कम करना, गोल्ड आयात घटाना और लोगों की बचत को फाइनेंशियल एसेट्स में लाना है.
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड में निवेश कैसे करें?
- SGB में निवेश के लिए आप बैंक, SHCIL (स्टॉक होल्डिंग कॉरपोरेशन) या तय पोस्ट ऑफिस से बॉन्ड खरीद सकते हैं.
- अगर ऑफलाइन खरीदा है, तो आपको SGB सर्टिफिकेट मिलता है.
- अगर ऑनलाइन खरीदा है, तो बॉन्ड डिमैट अकाउंट में दिखता है.
- इन बॉन्ड्स पर 2.5% सालाना ब्याज मिलता है, जो हर 6 महीने में दिया जाता है.
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड पर टैक्स नियम
इसमें ब्याज पर टैक्स लगता है, क्योंकि इसे आपकी आय में जोड़ा जाता है. लेकिन अगर आप मैच्योरिटी या प्रीमैच्योर रिडेम्प्शन पर बॉन्ड भुनाते हैं, तो उस पर कैपिटल गेन टैक्स नहीं लगता. अगर बॉन्ड को स्टॉक एक्सचेंज पर बेचते हैं, तो मिलने वाले कैपिटल गेन पर इंडेक्सेशन का फायदा मिलता है. सरल शब्दों में कहें तो SGB लंबी अवधि के लिए टैक्स-फ्रेंडली और सुरक्षित गोल्ड निवेश का अच्छा ऑप्शन है.
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