मददगार तो है, पर ‘गुरु’ नहीं
एक्सपर्ट्स का मानना है कि AI टूल्स फाइनेंस की बेसिक बातें समझाने में बेहतरीन हैं. अगर आपको समझना है कि SIP क्या है, इंश्योरेंस के क्या फायदे हैं या टैक्स स्लैब कैसे काम करता है, तो AI इसे बहुत आसान भाषा में समझा सकता है. भारत जैसे देश में, जहां फाइनेंशियल लिटरेसी सिर्फ 27% है, वहां AI शुरुआती समझ बनाने में काफी मददगार साबित हो सकता है.
लेकिन पर्सनल फाइनेंस ‘वन-टाइम’ काम नहीं
फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स का मानना है कि पर्सनल फाइनेंस कोई ‘एक बार सेट करो और भूल जाओ’ वाली चीज नहीं है. इसमें आपकी इनकम, रिस्क लेने की क्षमता, निवेश की अवधि, टैक्स स्थिति और परिवार की जिम्मेदारियों को ध्यान में रखना पड़ता है. सही एसेट एलोकेशन और समय-समय पर पोर्टफोलियो की समीक्षा जरूरी होती है. यह काम AI पूरी तरह और व्यवहारिक तरीके से नहीं कर सकता.
बिहेवियरल बायस पर AI का असर सीमित
कई रिसर्च बताती हैं कि 60–70% खराब निवेश फैसलों के पीछे भावनात्मक गलतियां होती है, जैसे बाजार गिरते ही घबराकर बेच देना या शॉर्ट-टर्म रिटर्न के पीछे भागना. AI आपको जानकारी तो दे सकता है, लेकिन आपकी भावनाओं और व्यवहार पर उसका ज्यादा कंट्रोल नहीं होता.
बदलते नियम और जमीनी हकीकत
टैक्स नियम, सरकारी गाइडलाइंस और फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स लगातार बदलते रहते हैं. AI के जवाब हर बार ताजा नियमों या बारीकियों को पूरी तरह कवर करें, यह जरूरी नहीं. ऐसे में केवल AI पर निर्भर रहना रिस्क भरा हो सकता है.
AI को असिस्टेंट की तरह इस्तेमाल करें
एक्सपर्ट्स का कहना है कि AI को सलाहकार नहीं, बल्कि सहायक की तरह इस्तेमाल करना ज्यादा समझदारी होगी. आप बेसिक जानकारी, तुलना और समझ के लिए AI का सहारा ले सकते हैं, लेकिन बड़े फैसलों जैसे निवेश, लोन या रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए इंसानी सलाह अभी भी जरूरी है.
अंतिम फैसला आपका
तकनीक आपकी जागरूकता और समझ बढ़ा सकती है, लेकिन जिम्मेदारी और अनुशासन इंसान को ही निभाना होता है. AI आपके फाइनेंशियल सफर में मदद कर सकता है, लेकिन आपकी जेब और भविष्य की पूरी जिम्मेदारी उसे सौंपना फिलहाल सही नहीं माना जा रहा है.
एक्सपर्ट की सलाह: असिस्टेंट बनाएं, एडवाइजर नहीं
‘प्लानरुपी इन्वेस्टमेंट सर्विसेज’ के फाउंडर अमोल जोशी के अनुसार, निवेश कोई ऐसी चीज नहीं है जिसे एक बार करके भूल जाएं. इसके लिए समय-समय पर पोर्टफोलियो की जांच और टैक्स का ध्यान रखना पड़ता है, जो फिलहाल AI पूरी तरह नहीं कर सकता. ‘फिनोवेट’ की को-फाउंडर नेहल मोटा कहती हैं कि AI सीखने के लिए तो अच्छा है, लेकिन अंतिम फैसला लेने के लिए किसी प्रोफेशनल सलाहकार या अपनी समझ का इस्तेमाल करना ही समझदारी है.
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