निवेश की दुनिया में अक्सर ‘क्या’ से ज्यादा ‘कब तक’ का महत्व होता है, क्योंकि लंबी अवधि का धैर्य ही साधारण बचत को बड़ी संपत्ति में बदलता है. यदि आप अपने निवेश को केवल 5 साल अतिरिक्त समय देते हैं, तो कंपाउंडिंग की शक्ति आपके मुनाफे को उम्मीद से कहीं ज्यादा बढ़ा सकती है. विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार के उतार-चढ़ाव से डरकर बाहर निकलने के बजाय टिके रहना ही वेल्थ क्रिएशन का असली मंत्र है. यह अतिरिक्त समय का निवेश ही तय करता है कि आप केवल लक्ष्य पूरा करेंगे या वास्तविक अमीरी हासिल करेंगे.
निवेश की जादुई ताकत: सिर्फ 5 साल अतिरिक्त रुकने से लगभग दोगुना हो सकता है आपका पैसा. (Image:AI)
5 लाख का निवेश और समय का जादू
कल्पना कीजिए कि एक कामकाजी पेशेवर ने अपनी 5-7 साल की मेहनत की कमाई से 5 लाख रुपये बचाए और उन्हें एक अच्छे इक्विटी म्यूचुअल फंड में एकमुश्त (Lumpsum) निवेश कर दिया. अगर हम ऐतिहासिक आंकड़ों के अनुसार 12 फीसदी का औसत वार्षिक रिटर्न मानकर चलें, तो 10 साल बाद यह राशि बढ़कर लगभग 15.5 लाख रुपये हो जाएगी. लेकिन असली चमत्कार तब होता है जब आप इस पैसे को अगले 5 साल के लिए और छोड़ देते हैं. बिना एक भी रुपया अतिरिक्त जमा किए, 15 साल पूरे होते ही आपका फंड 27.36 लाख रुपये का हो जाएगा. यानी सिर्फ 5 साल का अतिरिक्त समय आपके मुनाफे को लगभग दोगुना करने की ताकत रखता है.
20 साल का सफर: 9 गुना बढ़ेगी दौलत
समय का निवेश पर क्या असर पड़ता है, इसे 20 साल के नजरिए से देखें तो आंकड़े और भी चौंकाने वाले हैं. वही 5 लाख रुपये का शुरुआती निवेश 20 साल बाद करीब 48.23 लाख रुपये बन सकता है. यह आपकी मूल राशि का लगभग 9 गुना है. यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि निवेशक ने न तो अपना जोखिम बढ़ाया और न ही अपनी तरफ से कोई नई राशि जोड़ी. यह पूरी तरह से ‘स्नोबॉल इफेक्ट’ है, जहां पिछले सालों में मिला रिटर्न खुद रिटर्न पैदा करने लगता है. जितना लंबा समय आप बाजार को देंगे, उतना ही कम बोझ आपकी जेब पर पड़ेगा और समय खुद आपकी संपत्ति को बढ़ाने का काम करेगा.
निफ्टी का इतिहास: धैर्य की जीत
फंड्स इंडिया द्वारा साल 2000 से निफ्टी-50 के प्रदर्शन के विश्लेषण में भी यही पैटर्न सामने आया है. जिन निवेशकों ने 2000 के दशक की शुरुआत में निवेश किया और कम से कम 7 साल तक टिके रहे, उन्होंने कई मार्केट साइकिल देखने के बावजूद अपने पैसे को औसतन 2.5 से 3 गुना बढ़ते देखा. यहां तक कि जिन्होंने 2008 की भारी मंदी के दौरान निवेश शुरू किया था, उन्होंने भी लंबी अवधि में शानदार रिकवरी और ग्रोथ दर्ज की. इतिहास गवाह है कि जब होल्डिंग पीरियड 7 साल से ऊपर निकल जाता है, तो निवेश की वैल्यू दोगुनी से भी ज्यादा होने की संभावनाएं प्रबल हो जाती हैं.
छोटा निवेश, बड़ा असर: 1 लाख की ताकत
अक्सर लोग सोचते हैं कि अमीर बनने के लिए शुरुआत में बहुत मोटी रकम चाहिए, लेकिन असल में ‘समय’ पूंजी की कमी को पूरा कर सकता है. अगर आप आज सिर्फ 1 लाख रुपये भी निवेश करते हैं-जो कि अक्सर लोग गैजेट्स या छुट्टियों पर खर्च कर देते हैं- तो 12 फीसदी के रिटर्न के हिसाब से यह 10 साल में 3 लाख रुपये से ज्यादा हो जाएगा. यदि आप इसे 15 साल तक खींच ले जाते हैं, तो यह राशि 5.5 लाख रुपये के पार पहुंच जाएगी. एक्सपर्ट्स का कहना है कि छोटी-छोटी बचत को अनुशासित तरीके से निवेश करना ईएमआई (EMI) भरने जैसा ही आसान है, जो लंबे समय में आपको करोड़पति बना सकता है.
‘ठीक-ठाक’ और ‘शानदार’ के बीच का अंतर
निवेश की सफलता का सबसे बड़ा सूत्र यह है कि आप अपने लक्ष्य तक पहुँचने के बाद भी ‘जल्दबाजी’ में पैसा न निकालें. कई निवेशक जैसे ही देखते हैं कि उनका पैसा दोगुना हो गया है, वे उसे भुना लेते हैं. लेकिन 10वें साल और 15वें साल के बीच का अंतर ही यह तय करता है कि आप केवल ‘ठीक-ठाक’ पैसा बनाएंगे या ‘अथाह’ दौलत. अतिरिक्त 5 साल का निवेश आपके पोर्टफोलियो की तस्वीर पूरी तरह बदल सकता है. इसलिए, अगर आप भी वेल्थ क्रिएशन का सपना देख रहे हैं, तो याद रखें कि बाजार में ‘टाइमिंग’ से ज्यादा ‘टाइम’ देना जरूरी है.
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Rakesh Singh is a chief sub editor with 14 years of experience in media and publication. International affairs, Politics and agriculture are area of Interest. Many articles written by Rakesh Singh published in …और पढ़ें
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