इतनी तेजी का दावा क्यों?
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, चांदी की मांग बढ़ने के तीन मुख्य कारण हैं:
सप्लाई में कमी: बाजार में चांदी की उतनी उपलब्धता नहीं है जितनी मांग है.
नई तकनीक: सोलर पैनल और इलेक्ट्रिक गाड़ियों (EV) के निर्माण में चांदी का इस्तेमाल बहुत तेजी से बढ़ रहा है.
बड़े निवेशक: अगर बड़े संस्थान चांदी में भारी निवेश शुरू करते हैं, तो कीमतें आसमान छू सकती हैं।
कैसे पहुंचेगा भाव 10 लाख तक?
अगर ग्लोबल मार्केट में चांदी $309 प्रति औंस पहुँचती है, तो भारत में इसकी कीमत कुछ इस तरह होगी:
डॉलर से रुपया: $309 लगभग ₹26,265 (प्रति औंस)।
किलोग्राम में भाव: करीब ₹8,44,500।
टैक्स और ड्यूटी: इसमें 15% इम्पोर्ट ड्यूटी, 3% GST और मेकिंग चार्ज जोड़ने के बाद कुल कीमत ₹10,05,000 के करीब बैठती है।
क्या यह पक्का है? नहीं, यह सिर्फ एक ‘एक्सट्रीम’ यानी सबसे ऊंचा अनुमान है। विशेषज्ञों ने तीन स्थितियां बताई हैं:
सामान्य स्थिति: भाव ₹4.40 लाख प्रति किलो तक।
मध्यम स्थिति: भाव ₹6.50 लाख प्रति किलो तक।
रिकॉर्ड स्थिति: भाव ₹10 लाख प्रति किलो तक।
आज की बात करें (20 फरवरी), तो इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन के अनुसार, चांदी फिलहाल ₹2.45 लाख प्रति किलोग्राम पर है।
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