रिकॉर्ड स्तर और बदले टारगेट
बीते हफ्ते चांदी ने 2,92,900 रुपये प्रति किलो के करीब नया रिकॉर्ड बनाया, जिसके बाद विश्लेषकों को अपने टारगेट तेजी से बढ़ाने पड़े. पहले जिन स्तरों को साल के अंत तक संभव माना जा रहा था, वे बहुत पहले ही हासिल हो गए. उदाहरण के तौर पर, पिछले साल चांदी के लिए 1,10,000 रुपये प्रति किलो का अनुमान लगाया गया था, लेकिन यह स्तर साल के पहले हिस्से में ही पार हो गया और कीमतें 2,50,000 रुपये प्रति किलो से ऊपर निकल गईं. इससे साफ है कि मांग अनुमान से कहीं ज्यादा तेज बढ़ रही है.
औद्योगिक और कीमती धातु की दोहरी ताकत
चांदी की सबसे बड़ी खासियत उसकी दोहरी भूमिका है. एक तरफ यह कीमती धातु है, तो दूसरी ओर इसका इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर एनर्जी, ईवी, बैटरी, मेडिकल उपकरण और कई इंडस्ट्री में होता है. यही वजह है कि बीते पांच सालों से चांदी की आपूर्ति मांग से कम बनी हुई है. खदानों से निकलने वाली चांदी उद्योग और निवेश की जरूरतें पूरी नहीं कर पा रही, जिससे बाजार में लगातार कमी बनी हुई है.
घटते भंडार और बढ़ती कीमतें
जब मांग आपूर्ति से ज्यादा होती है, तो जमीन के ऊपर मौजूद पुराने भंडार का इस्तेमाल करना पड़ता है. चांदी के साथ भी यही हो रहा है. जैसे-जैसे ये भंडार घट रहे हैं, वैसे-वैसे भौतिक चांदी रखने वाले लोग इसे ऊंचे दामों पर ही बेचने को तैयार हो रहे हैं. इसका सीधा असर कीमतों पर पड़ रहा है. विशेषज्ञ मानते हैं कि जब तक यह संरचनात्मक कमी बनी रहेगी, तब तक चांदी की कीमतों में गिरावट सीमित ही रहेगी.
केंद्रीय बैंकों की एंट्री से बढ़ा भरोसा
एक और अहम वजह है केंद्रीय बैंकों का रुख. पिछले कुछ वर्षों में जब केंद्रीय बैंकों ने बड़े पैमाने पर सोना खरीदा, अब संकेत मिल रहे हैं कि वे चांदी पर भी ध्यान देने लगे हैं. कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, सोने के साथ-साथ चांदी को भी रिजर्व का हिस्सा बनाया जा रहा है. इससे बाजार को यह संकेत मिला कि चांदी सिर्फ ट्रेडिंग मेटल नहीं, बल्कि रणनीतिक संपत्ति के तौर पर उभर रही है. यही कारण है कि कीमतें 3 लाख रुपये प्रति किलो के स्तर के करीब टिकी हुई हैं.
उतार-चढ़ाव के बावजूद तेजी बरकरार
विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के दिनों में दिखी हल्की गिरावट मुनाफावसूली और डॉलर की मजबूती की वजह से है, न कि किसी बुनियादी कमजोरी से. रुपये के मुकाबले डॉलर की मजबूती भी घरेलू बाजार में चांदी की कीमतों को सहारा दे रही है. माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में कुछ उतार-चढ़ाव रह सकता है, लेकिन हर गिरावट पर खरीदारी का रुझान बना रहेगा.
क्या 3 लाख रुपये के पार जाएगी चांदी?
मौजूदा कीमतों को देखें तो चांदी 3 लाख रुपये के स्तर से महज 4–5 प्रतिशत दूर है. विश्लेषकों का मानना है कि अगर कीमतें 2,95,000 रुपये के ऊपर टिक जाती हैं, तो तेजी और तेज हो सकती है. ऐसे में 3,05,000 से लेकर 3,20,000 रुपये तक के स्तर भी संभव हैं. मजबूत सपोर्ट जोन 2,80,000–2,83,000 रुपये के आसपास माना जा रहा है. कुल मिलाकर, सप्लाई की कमी, बढ़ती औद्योगिक मांग और निवेशकों की दिलचस्पी को देखते हुए चांदी का रुझान फिलहाल मजबूत बना हुआ है.
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