बजट से पहले गिरावट का पुराना ट्रेंड
साल 2010 से 2022 तक के आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि बजट से ठीक पहले वाले हफ्ते या महीने में शेयर बाजार का प्रदर्शन अक्सर कमजोर रहा है. पिछले 15 वर्षों में बजट से एक हफ्ते पहले निफ्टी का औसतन रिटर्न करीब 0.52 प्रतिशत नकारात्मक रहा है. इस अवधि में निफ्टी सिर्फ 8 बार ही बढ़त के साथ बंद हो पाया. यह ट्रेंड हाल के वर्षों में भी जारी रहा है, जहां पिछले पांच में से चार साल बजट से पहले बाजार गिरावट में रहा.
नीतिगत बदलाव का डर क्यों बढ़ाता है दबाव
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, बजट से पहले सबसे बड़ी चिंता सरकारी नीतियों में संभावित बदलाव को लेकर होती है. टैक्स दरों में बदलाव, सब्सिडी में कटौती या किसी सेक्टर को उम्मीद के मुताबिक राहत न मिलने की आशंका निवेशकों को सतर्क कर देती है. इसी अनिश्चितता के चलते कई निवेशक मुनाफावसूली करना बेहतर समझते हैं, जिससे बाजार पर दबाव बढ़ जाता है. इसके अलावा, बजट से पहले आने वाली अफवाहें और अनुमान भी बाजार की दिशा को प्रभावित करते हैं.
बजट वाले दिन बढ़ जाती है वोलैटिलिटी
आंकड़े बताते हैं कि बजट के दिन शेयर बाजार में सामान्य दिनों के मुकाबले कहीं ज्यादा उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है. औसतन बजट वाले दिन इंट्राडे वोलैटिलिटी करीब 2.65 प्रतिशत तक रहती है. यही वजह है कि कई ट्रेडर्स इस दिन सीमित दायरे में या बेहद सतर्क होकर सौदे करते हैं. हालांकि, दिलचस्प बात यह है कि बजट के बाद बाजार में अक्सर राहत देखने को मिलती है और अगले हफ्ते औसतन 1.36 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई है.
बजट 2026 से क्या उम्मीद कर रहा है बाजार
जेएम फाइनेंशियल सर्विसेज के टेक्निकल और डेरिवेटिव रिसर्च प्रमुख राहुल शर्मा के अनुसार, यूनियन बजट 2026 से बाजार को संतुलित रुख की उम्मीद है. विशेषज्ञ मानते हैं कि सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर, डिफेंस और रेलवे जैसे सेक्टर में पूंजीगत खर्च बढ़ा सकती है, ताकि वैश्विक अनिश्चितताओं और अमेरिकी टैरिफ नीतियों जैसे दबावों से निपटा जा सके. इसके अलावा, एमएसएमई, मैन्युफैक्चरिंग, ग्रीन एनर्जी और निर्यात को बढ़ावा देने की भी मांग उठ रही है.
जोखिम, वैल्यूएशन और निवेशकों के लिए सलाह
हालांकि उम्मीदों के बीच जोखिम भी कम नहीं हैं. अगर बजट में वित्तीय लक्ष्य बिगड़ते हैं या बाजार की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरता, तो तेज बिकवाली देखने को मिल सकती है. ऊंची वैल्यूएशन, एफआईआई की संभावित बिकवाली, रुपये में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक तनाव भी बाजार के लिए चुनौती बने हुए हैं. विशेषज्ञ निवेशकों को सलाह दे रहे हैं कि बजट के बाद स्थिति साफ होने तक कुछ नकदी सुरक्षित रखें और डिफेंस व पीएसयू बैंक जैसे चुनिंदा सेक्टर पर ही फोकस बनाए रखें. कुल मिलाकर, आंकड़े यही संकेत देते हैं कि बजट से पहले बाजार का दबाव में रहना सामान्य बात है, लेकिन बजट के बाद दिशा साफ होते ही बाजार में नई ऊर्जा देखने को मिल सकती है.
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