अमेरिकी घटनाक्रम और फेड की नीति पर नजर
विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले सप्ताह में बाजार की नजर अमेरिका में व्यापार शुल्क से जुड़े कानूनी घटनाक्रम और फेडरल रिजर्व के रुख पर रहेगी. जेएम फाइनेंशियल सर्विसेज के अनुसार, यदि फेड ब्याज दरों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं करता है, तब भी कमजोर आर्थिक संकेतों के चलते साल के अंत तक दरों में कटौती की उम्मीद बनी रहेगी. ऐसी स्थिति में सोने और चांदी जैसे सुरक्षित निवेश विकल्पों को समर्थन मिलता है और कीमतों में मजबूती देखी जाती है.
केंद्रीय बजट का घरेलू बाजार पर असर
भारत में भी निवेशकों की नजर 1 फरवरी को पेश होने वाले केंद्रीय बजट 2026-27 पर टिकी हुई है. विशेषज्ञों का कहना है कि बजट में आयात शुल्क, कर संरचना और राजकोषीय उपायों में बदलाव से घरेलू सोने और चांदी के बाजार पर सीधा असर पड़ सकता है. यदि सरकार उपभोग और निवेश को बढ़ावा देने वाले कदम उठाती है, तो इससे कीमती धातुओं की मांग को और बल मिल सकता है. यही वजह है कि घरेलू निवेशक फिलहाल सतर्क लेकिन सकारात्मक रुख अपनाए हुए हैं.
एमसीएक्स में सोना-चांदी ने बनाए नए रिकॉर्ड
पिछले सप्ताह घरेलू वायदा बाजार मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) में सोने और चांदी की कीमतों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली. सोने के भाव में करीब 9.5 प्रतिशत की उछाल आई और यह अब तक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया. वहीं, चांदी ने भी जोरदार छलांग लगाते हुए पहली बार तीन लाख रुपये प्रति किलोग्राम का आंकड़ा पार कर लिया. विश्लेषकों का कहना है कि यह तेजी केवल सट्टा गतिविधियों की वजह से नहीं, बल्कि मजबूत बुनियादी कारणों से आई है.
अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिल रहा मजबूत संकेत
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी कीमती धातुओं का प्रदर्शन बेहद मजबूत रहा है. कॉमेक्स में सोना रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंच गया, जबकि चांदी ने पहली बार 100 डॉलर प्रति औंस का ऐतिहासिक स्तर पार किया. विशेषज्ञों के मुताबिक, अमेरिका-ईरान तनाव, यूरोप और मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक जोखिम, और वैश्विक आर्थिक सुस्ती की आशंका ने निवेशकों को जोखिम भरे परिसंपत्तियों से दूर रखा है. इसका सीधा फायदा सोना और चांदी को मिला है.
ईटीएफ निवेश और सुरक्षित मांग का समर्थन
विश्लेषकों का कहना है कि एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ईटीएफ) के जरिए भी सोने और चांदी में निवेश बढ़ा है. जब बाजार में अस्थिरता बढ़ती है, तब बड़े निवेशक ईटीएफ के माध्यम से सुरक्षित धातुओं में पैसा लगाना पसंद करते हैं. इससे कीमतों को अतिरिक्त समर्थन मिलता है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कीमतों में हल्की गिरावट आती भी है, तो निवेशक उसे खरीदारी के मौके के रूप में देख सकते हैं.
आगे का रुझान: तेजी बरकरार, लेकिन उतार-चढ़ाव संभव
कुल मिलाकर, विश्लेषकों का अनुमान है कि अगले सप्ताह भी सोना और चांदी मजबूत बने रह सकते हैं. हालांकि, बीच-बीच में मुनाफावसूली के चलते उतार-चढ़ाव से इनकार नहीं किया जा सकता. वैश्विक फैसले, बजट से जुड़े संकेत और फेड की टिप्पणियां बाजार की दिशा तय करेंगी. निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे जल्दबाजी के बजाय सोच-समझकर रणनीति बनाएं और लंबी अवधि के नजरिए से ही निवेश करें.
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