पश्चिम एशिया में युद्ध से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बाधित हुआ, जिससे गैस सप्लाई प्रभावित हुई है. शहरी इलाकों में गैस बुकिंग की टाइमलाइन 25 दिन और ग्रामीण में 45 दिन कर दी गई है.
भारत अपनी जरूरत का 50 फीसदी से अधिक गैस आयात करता है.
सुजाता शर्मा ने कहा है कि एलपीजी की कोई कमी नहीं है और कहीं से भी ‘ड्राई-आउट’ (स्टॉक खत्म होने) की खबर नहीं मिली है. उन्होंने कहा कि लोग घबराहट में आकर (Panic Booking) गैस बुक कर रहे हैं, जिसकी वजह से बुकिंग की संख्या बढ़ी है, न कि किसी वास्तविक कमी के कारण.
एलपीजी से जुड़ी मुख्य बातें
होर्मुज की जगह वैकल्पिक रास्ते: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने के बाद भारत ने अपनी रणनीति बदल दी है. अब भारत का 70% आयात उन रास्तों से आ रहा है जो होर्मुज से होकर नहीं गुजरते. युद्ध शुरू होने से पहले यह आंकड़ा 55% था.
अस्पतालों को प्राथमिकता: कमर्शियल एलपीजी के मामले में सरकार ने अस्पतालों और शिक्षण संस्थानों को प्राथमिकता पर रखा है ताकि जरूरी सेवाएं प्रभावित न हों.
घरेलू उत्पादन और रिफाइनरी: देश की रिफाइनरियां अपनी पूरी क्षमता (100% से भी ज्यादा) पर काम कर रही हैं ताकि तेल और गैस की आपूर्ति बनी रहे.
ईंधन के विकल्प: पर्यावरण मंत्रालय ने सलाह दी है कि अगले एक महीने तक दबाव कम करने के लिए बायोमास, केरोसिन और कोयले जैसे वैकल्पिक ईंधनों का भी अस्थाई तौर पर उपयोग किया जा सकता है.
भारत की मजबूत स्थिति
भारत रोजाना लगभग 55 लाख बैरल कच्चे तेल की खपत करता है. सरकार के मुताबिक, भारत अब 27 के बजाय 40 देशों से तेल खरीद रहा है. इस ‘स्ट्रक्चरल डाइवर्सिफिकेशन’ की वजह से भारत के पास आज वो विकल्प मौजूद हैं जो कई अन्य देशों के पास नहीं हैं.
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जय ठाकुर 2018 से खबरों की दुनिया से जुड़े हुए हैं. 2022 से News18Hindi में सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं और बिजनेस टीम का हिस्सा हैं. बिजनेस, विशेषकर शेयर बाजार से जुड़ी खबरों में रुचि है. इसके अलावा दे…और पढ़ें
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