शेयर बाजार में गिरावट के बीच शुगर कंपनियों के शेयरों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली. कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने इस सेक्टर के प्रति निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है. तेल महंगा होने से एथेनॉल की मांग बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है. इसी उम्मीद के चलते कई शुगर कंपनियों के शेयरों में 6 से 10 प्रतिशत तक उछाल आया.
वेस्ट एशिया संकट से तेल महंगा, एथेनॉल उम्मीदों पर शुगर कंपनियों के शेयर चढ़े. (Image:AI)
शुगर शेयरों में जोरदार तेजी
सोमवार के कारोबार में कई शुगर कंपनियों के शेयर तेजी के साथ बंद हुए. द्वारिकेश शुगर इंडस्ट्रीज के शेयर लगभग 8.5 प्रतिशत तक उछल गए. इसके अलावा डालमिया भारत शुगर में करीब 7.7 प्रतिशत और धामपुर शुगर मिल्स में करीब 7.5 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई. बजाज हिंदुस्तान शुगर के शेयर भी करीब 6.8 प्रतिशत ऊपर चढ़े, जबकि उत्तम शुगर मिल्स में 6 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी देखने को मिली. प्राज इंडस्ट्रीज और श्री रेनुका शुगर्स के शेयर भी मजबूत रहे. बलरामपुर चीनी मिल्स में भी करीब 3 से 4 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई.
कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाया उत्साह
शुगर शेयरों में यह तेजी मुख्य रूप से कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज उछाल की वजह से आई. पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई है. इसी वजह से ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 120 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई. वहीं अमेरिकी बेंचमार्क डब्ल्यूटीआई क्रूड भी लगभग इसी स्तर तक पहुंच गया. तेल की कीमतों में यह तेजी इसलिए भी आई क्योंकि युद्ध के कारण ऊर्जा उत्पादन और सप्लाई रूट प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है.
होर्मुज जलडमरूमध्य बना बड़ी चिंता
मध्य पूर्व में तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरता है. अनुमान के मुताबिक रोजाना करीब 1.5 करोड़ बैरल कच्चा तेल इसी रास्ते से दुनिया के अलग-अलग देशों तक पहुंचता है. यह वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा है. मौजूदा संघर्ष के कारण इस मार्ग पर खतरा बढ़ गया है, जिससे बाजार में सप्लाई बाधित होने की आशंका बनी हुई है. कुछ देशों ने उत्पादन भी कम कर दिया है क्योंकि निर्यात में दिक्कतें आ रही हैं.
तेल महंगा होने से एथेनॉल की मांग बढ़ती है
कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने का सीधा फायदा शुगर कंपनियों को मिल सकता है. जब तेल महंगा होता है तो पेट्रोल में एथेनॉल मिलाना ज्यादा किफायती हो जाता है. ऐसे में शुगर मिलें गन्ने से चीनी बनाने के बजाय ज्यादा एथेनॉल बनाने की ओर रुख करती हैं. इससे उनकी कमाई बढ़ने की संभावना रहती है. यही वजह है कि तेल की कीमतों में तेजी आते ही शुगर कंपनियों के शेयरों में भी तेजी देखने को मिलती है.
क्या है एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम
एथेनॉल एक बायोफ्यूल है, जो गन्ना, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से बनाया जाता है. यह पेट्रोल की तुलना में ज्यादा साफ ईंधन माना जाता है और पर्यावरण के लिए भी बेहतर होता है. भारत सरकार ने पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने का लक्ष्य तय किया है, जिससे देश की कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम हो सके. इस नीति से किसानों और शुगर मिलों दोनों को फायदा मिलता है क्योंकि इससे गन्ने की मांग बढ़ती है. पिछले कुछ वर्षों में यही एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम भारत के शुगर सेक्टर की ग्रोथ का एक बड़ा आधार बन गया है.
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Rakesh Singh is a chief sub editor with 14 years of experience in media and publication. International affairs, Politics and agriculture are area of Interest. Many articles written by Rakesh Singh published in …और पढ़ें
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