सीउरी रेलवे स्टेशन, बीरभूम, अब अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत रिडेवलप हुआ है. रवींद्रनाथ टैगोर की यादें इससे जुड़ी हैं. स्टेशन में बीरभूम की टेराकोटा वास्तुकला और बाउल संस्कृति की झलक है.
1337 स्टेशनों में शामिल है यह.
टैगोर ने बीरभूम की लाल मिट्टी और ग्रामीण जीवन को अपनी रचनाओं में जीवंत किया और विभूतिभूषण बंद्योपाध्याय तथा ताराशंकर बंद्योपाध्याय जैसे साहित्यकारों ने अपने लेखन में बीरभूम को जीवंत स्वरूप को चित्रित किया है, जिसमें सीउरी एक अभिन्न हिस्सा रहा है.
ब्रिटिश काल से साहिबगंज लूप लाइन पर रेशम-नील व्यापार के लिए जाना जाता था. स्टेशन ने इन साहित्यिक-संस्कृतिक धरोहरों को सहेजा है. अब अमृत भारत योजना के तहत लगभग 3.5 से 5 करोड़ रुपये की लागत से हुए इस रिडेवलपमेंट से स्टेशन आधुनिक स्टेशन में तब्दील हो गया है. स्टेशन भवन की मुख्य इमारत में बीरभूम की टेराकोटा वास्तुकला, अल्पना और बाउल संस्कृति से प्रेरित म्यूरल एवं पेंटिंग्स लगाए गई हैं, जो क्षेत्रीय पहचान को संरक्षित रखते हुए आधुनिकता का समावेश करते हैं.
प्रमुख सुविधाओं में प्लेटफॉर्म शेल्टर,पार्किंग और सर्कुलेटिंग एरिया, उन्नत साइनेज, ट्रेन इंडिकेशन बोर्ड तथा कोच इंडिकेशन बोर्ड, दिव्यांगजन-अनुकूल रैंप, टॉयलेट तथा लिफ्ट भी लगाई गयी है, जिससे बुजुर्गों और शारीरिक रूप से चुनौतीपूर्ण यात्रियों के लिए प्लेटफॉर्म तक आना जाना आसान हो गया है. यह बदलाव बीरभूम के साहित्यिक-पर्यटन महत्व को नई ऊर्जा देगा.
बक्रेश्वर के गर्म कुंड, तिलपाड़ा बैराज, शांतिनिकेतन और तारापीठ जैसे स्थलों के लिए आने वाले तीर्थयात्रियों व पर्यटकों को अब आधुनिक ट्रांजिट पॉइंट मिलेगा. इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा, बीरभूम के प्रसिद्ध मोरब्बा, हथकरघा और हस्तशिल्प उत्पादों को बढ़ावा मिलेगा.
अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत पश्चिम बंगाल में 101 स्टेशनों का चयन हुआ है, जिनमें से 9 (जिनमें सीउरी शामिल) का काम पूरा हो चुका है. यह परिवर्तन अतीत की साहित्यिक विरासत टैगोर की यादों और बीरभूम की जीवंत छवि को भविष्य की आधुनिक बुनियादी ढांचे से जोड़ते हुए ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है.
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