जब बेटी के भविष्य के लिए निवेश की योजना बनती है, तो माता-पिता के सामने कई विकल्प होते हैं. सुरक्षित और तय रिटर्न वाली योजनाएं भरोसा देती हैं, जबकि इक्विटी ज्यादा कमाई का सपना दिखाती है. इसी दुविधा में सुकन्या समृद्धि योजना और इक्विटी निवेश की तुलना जरूरी हो जाती है. यह फैसला असल में सुरक्षा बनाम ग्रोथ के बीच संतुलन चुनने का होता है.
बेटी के लिए निवेश में सुकन्या समृद्धि और इक्विटी में क्या है फर्क. (Image:AI)
सुकन्या समृद्धि योजना क्यों है भरोसेमंद
सुकन्या समृद्धि योजना (SSY) माता-पिता की पहली पसंद बनी हुई है, क्योंकि इसमें सुरक्षा और टैक्स बचत दोनों मिलती हैं. फिलहाल इसमें करीब 8.2% का ब्याज मिलता है और निवेश पर धारा 80C के तहत टैक्स छूट भी मिलती है. यह योजना पूरी तरह EEE मॉडल पर आधारित है, यानी निवेश, ब्याज और मैच्योरिटी– तीनों पर टैक्स नहीं लगता. यही कारण है कि यह लंबी अवधि के लिए एक भरोसेमंद विकल्प मानी जाती है.
तय रिटर्न से बनता है बड़ा फंड
चार्टर्ड अकाउंटेंट मीनल गोयल के मुताबिक, अगर कोई माता-पिता 15 साल तक हर साल 1.5 लाख रुपये सुकन्या योजना में निवेश करते हैं, तो बेटी के 21 साल की उम्र तक यह रकम करीब 71 लाख रुपये तक पहुंच सकती है. सबसे बड़ी बात यह है कि यह पूरी राशि टैक्स-फ्री होती है. जिन लोगों को निवेश में स्थिरता और स्पष्टता पसंद है, उनके लिए यह योजना मानसिक सुकून भी देती है.
इक्विटी निवेश में ज्यादा ग्रोथ की संभावना
वहीं, इक्विटी निवेश की कहानी अलग है. शेयर बाजार और इक्विटी म्यूचुअल फंड्स लंबे समय में आमतौर पर फिक्स्ड इनकम स्कीम्स से ज्यादा रिटर्न देते हैं. हालांकि इसमें उतार-चढ़ाव भी रहता है. इक्विटी का मकसद ग्रोथ होता है, न कि गारंटी. लंबी अवधि तक निवेश बनाए रखने वाले निवेशकों को यहां बेहतर वेल्थ क्रिएशन का मौका मिलता है, भले ही बीच-बीच में बाजार गिरता-बढ़ता रहे.
बीच का रास्ता अपनाना ज्यादा समझदारी
विशेषज्ञ मानते हैं कि सुकन्या और इक्विटी में से किसी एक को चुनना जरूरी नहीं है. सुकन्या योजना जहां पूंजी की सुरक्षा देती है, वहीं इक्विटी धैर्य रखने वालों को बड़ा रिटर्न दे सकती है. ऐसे में दोनों का संतुलन बनाकर चलना बेहतर रणनीति हो सकती है. बेटी के भविष्य के लिए सही विकल्प वही होगा, जो आपकी जोखिम उठाने की क्षमता और लंबे समय के लक्ष्यों के हिसाब से फिट बैठे.
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Rakesh Singh is a chief sub editor with 14 years of experience in media and publication. International affairs, Politics and agriculture are area of Interest. Many articles written by Rakesh Singh published in …और पढ़ें
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