डोनाल्ड ट्रंप के 15 प्रतिशत ग्लोबल टैरिफ पर भारतीय मूल के अमेरिकी वकील नील कात्याल ने कानूनी मोर्चा खोल दिया है और कहा है कि यह कदम संविधान और सरकार की पुरानी दलीलों के खिलाफ है. इस मुद्दे पर पूर्व आईएमएफ अधिकारी गीता गोपीनाथन ने भी उनका समर्थन किया है, जिससे टैरिफ के भविष्य और रोल बैक होने की बहस तेज हो गई है.
नील कात्याल ने कहा कि ट्रंप प्रशासन जिस सेक्शन 122 के तहत टैरिफ लगाने की बात कर रहा है, उसी प्रावधान को पहले अमेरिकी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अलग तरह से पेश किया था. उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि अगर राष्ट्रपति को इतने व्यापक टैरिफ लगाने हैं, तो उन्हें कांग्रेस से मंजूरी लेनी चाहिए, क्योंकि टैक्स लगाने का अधिकार कांग्रेस के पास है.
गीता गोपीनाथन का समर्थन
पूर्व आईएमएफ फर्स्ट डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर गीता गोपीनाथन (Gita Gopinath) ने भी नील कात्याल के तर्क का समर्थन किया है. उन्होंने कहा कि ट्रेड डेफिसिट और बैलेंस ऑफ पेमेंट्स डेफिसिट को एक जैसा मानना बेसिक इंटरनेशनल इकोनॉमिक्स के खिलाफ है और सेक्शन 122 के तहत टैरिफ को सही ठहराना कानूनी और आर्थिक रूप से कमजोर तर्क है.
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद नया विवाद
इससे पहले अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 6 3 के फैसले में ट्रंप प्रशासन के पुराने टैरिफ को असंवैधानिक बताया था और कहा था कि राष्ट्रपति ने इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर एक्ट के तहत अपनी सीमा से ज्यादा अधिकार का इस्तेमाल किया. कोर्ट ने साफ किया कि टैक्स लगाने की संवैधानिक शक्ति मुख्य रूप से कांग्रेस के पास है.
ट्रंप ने इसके बाद सेक्शन 122 के तहत 10 प्रतिशत टैरिफ लगाया और बाद में इसे बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया. ट्रंप ने कोर्ट के फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि उनकी सरकार आगे कानूनी तरीके से नए टैरिफ लागू करेगी.
भारत समेत कई देशों पर असर
ट्रंप का नया टैरिफ ऐसे समय आया है जब अमेरिका और भारत के बीच ट्रेड बातचीत चल रही है. दोनों देशों ने हाल ही में अंतरिम ट्रेड फ्रेमवर्क की घोषणा की है और भारत सरकार ने कहा है कि वह नए टैरिफ के असर का अध्ययन कर रही है. वाइट हाउस के एक अधिकारी ने कहा कि भारत सहित कई देश अभी भी 10 प्रतिशत ग्लोबल टैरिफ के दायरे में रहेंगे, जब तक कोई नया कानूनी आधार नहीं आता.
कानूनी लड़ाई लंबी होने के संकेत
नील कात्याल ने कहा कि यह मामला किसी एक राष्ट्रपति या राजनीति से ज्यादा संविधान और सत्ता के संतुलन से जुड़ा है. उन्होंने कहा कि अमेरिका में राष्ट्रपति शक्तिशाली हो सकता है, लेकिन संविधान उससे भी ज्यादा शक्तिशाली है और यही इस केस का असली मुद्दा है.
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जय ठाकुर 2018 से खबरों की दुनिया से जुड़े हुए हैं. 2022 से News18Hindi में सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं और बिजनेस टीम का हिस्सा हैं. बिजनेस, विशेषकर शेयर बाजार से जुड़ी खबरों में रुचि है. इसके अलावा दे…और पढ़ें
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