ट्रंप प्रशासन ने 2025 में लगभग हर देश से आयात पर रेसिप्रोकल टैरिफ लगाए थे, जिसमें चीन पर 34% तक और अन्य देशों पर 10% बेसलाइन टैरिफ शामिल थे. इसके अलावा कनाडा, मैक्सिको और चीन से कुछ सामानों पर 25% अतिरिक्त टैरिफ फेंटानिल रोकथाम के नाम पर लगाए गए थे. कोर्ट ने इनमें से अधिकांश को अवैध ठहराया, हालांकि स्टील, एल्यूमिनियम जैसे कुछ टैरिफ दूसरे कानूनों (राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े) के तहत बने रहेंगे.
रिफंड का बड़ा सवाल
एक्सपर्ट के अनुसार, इससे ग्लोबल ट्रेड संबंधों में बदलाव आ सकता है और अमेरिकी उपभोक्ताओं पर पहले से बढ़ी कीमतें कम हो सकती हैं. अब तक इन टैरिफ से अमेरिकी ट्रेजरी में 133 से 200 अरब डॉलर तक का रेवेन्यू जमा हुआ है. कोर्ट ने रिफंड पर साफ निर्देश नहीं दिया, लेकिन फैसला रेट्रोएक्टिव है यानी पहले से कलेक्ट किए गए टैरिफ अवैध माने जाएंगे.
अमेरिकी आयातकों को मिलेगा रिफंड
रिफंड मुख्य रूप से अमेरिकी आयातकों (कंपनियों जैसे Costco, Toyota, Revlon, Goodyear आदि) को मिलेगा, क्योंकि टैरिफ उन्होंने ही अमेरिकी कस्टम्स को दिए थे न कि सीधे विदेशी देशों ने. विदेशी निर्यातक अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हुए थे, लेकिन पैसा अमेरिकी बिजनेस से आया था.
ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों ने पहले ही कहा है कि अगर टैरिफ अवैध पाए जाते हैं, तो ब्याज सहित रिफंड दिए जाएंगे. यूएस कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड (CIT) में सैकड़ों कंपनियां पहले से मुकदमे दायर कर चुकी हैं. ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट के अनुसार, ट्रेजरी के पास पर्याप्त फंड (लगभग 774 बिलियन डॉलर) हैं, लेकिन रिफंड प्रक्रिया जटिल होगी—यह हफ्तों, महीनों या एक साल तक लग सकता है. रिफंड ऑटोमैटिक नहीं होंगे. आयातकों को क्लेम फाइल करना पड़ेगा.
ट्रंप ने फैसले पर तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वे अन्य कानूनी रास्तों से टैरिफ जारी रखेंगे और कांग्रेस से समर्थन मांगेंगे. यह फैसला वैश्विक अर्थव्यवस्था, खासकर चीन, कनाडा और मैक्सिको जैसे प्रमुख व्यापारिक साझेदारों के साथ संबंधों को प्रभावित करेगा. यह ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की अब तक की सबसे बड़ी न्यायिक हार मानी जा रही है. आगे क्या होता है, यह निचली अदालतों और संभावित नए कानूनों पर निर्भर करेगा।
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