अक्सर जब कोई बैंक हमारा पर्सनल लोन या क्रेडिट कार्ड का आवेदन रिजेक्ट कर देता है, तो मन में सबसे पहला डर यही आता है कि अब मेरे क्रेडिट स्कोर का क्या होगा? क्या रिजेक्शन से स्कोर गिर जाता है? आइए इस डर के पीछे का सच समझते हैं.
क्रेडिट स्कोर एक 3 डिजिट की रेटिंग होती है.
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1. रिजेक्शन से नहीं, ‘पूछताछ’ से पड़ता है क्रेडिट स्कोर पर असर
सच तो यह है कि बैंक द्वारा लोन रिजेक्ट करने से आपके क्रेडिट स्कोर पर सीधा कोई असर नहीं पड़ता. सिबिल जैसी संस्थाओं को बैंक यह नहीं बताते कि उन्होंने आपका लोन रिजेक्ट कर दिया है. असर तब पड़ता है जब बैंक आपके स्कोर की जांच करता है, जिसे ‘हार्ड इंक्वायरी’ कहते हैं. जब भी आप लोन के लिए फॉर्म भरते हैं, बैंक आपकी रिपोर्ट देखता है और इससे आपका स्कोर कुछ पॉइंट्स (जैसे 2-5 पॉइंट्स) कम हो सकता है. यह गिरावट मामूली और अस्थायी होती है.
2. असली खतरा: बार-बार आवेदन करना
एक बार लोन रिजेक्ट होने पर घबराकर 4-5 अलग-अलग बैंकों में तुरंत अप्लाई करना सबसे बड़ी गलती है. हर बार जब आप नए बैंक में अप्लाई करेंगे, एक नई ‘हार्ड इंक्वायरी’ दर्ज होगी. बहुत सारी इंक्वायरी यह दर्शाती हैं कि आप क्रेडिट हंगरी हैं. इससे भविष्य में लोन मिलना और मुश्किल हो जाता है.
3. खुद स्कोर चेक करने से कोई नुकसान नहीं
अगर आप किसी ऐप या वेबसाइट पर अपना क्रेडिट स्कोर खुद चेक करते हैं, तो इसे ‘सॉफ्ट इंक्वायरी’ कहा जाता है. इससे आपके स्कोर पर जीरो असर पड़ता है. आप जितनी बार चाहें अपना स्कोर देख सकते हैं.
लोन रिजेक्ट हो जाए तो क्या करें?
- तुरंत दोबारा अप्लाई न करें: कम से कम 3 से 6 महीने का इंतजार करें.
- कारण समझें: क्या आपका स्कोर 700 से कम है? क्या आपने पुराने बिल समय पर नहीं भरे? या आपकी सैलरी कम है?
- क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेशियो कम करें: अगर आप क्रेडिट कार्ड की पूरी लिमिट खर्च कर रहे हैं, तो उसे 30% के अंदर लाएं.
- गलतियां सुधारें: अपनी क्रेडिट रिपोर्ट चेक करें कि कहीं कोई गलत जानकारी तो दर्ज नहीं है.
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