1. निजी टैक्स राहत पर सबसे ज्यादा नजर
आम उपभोक्ताओं की सबसे बड़ी उम्मीद व्यक्तिगत आयकर में राहत को लेकर है. पिछले बजट में नई टैक्स व्यवस्था के तहत टैक्स-फ्री आय की सीमा 12 लाख रुपये तक बढ़ाई गई थी. अब चर्चा है कि सरकार टैक्स स्लैब में और बदलाव कर सकती है या पति-पत्नी के लिए जॉइंट टैक्सेशन जैसे विकल्प पर विचार कर सकती है. अगर ऐसा होता है, तो मध्यम वर्ग की बचत बढ़ेगी और खपत को सीधा समर्थन मिलेगा.
2. खाने-पीने की महंगाई पर काबू की उम्मीद
घरेलू बजट पर सबसे ज्यादा असर खाने-पीने की चीजों की कीमतों का पड़ता है. टमाटर, प्याज और आलू जैसी जरूरी सब्जियों की कीमतों में उतार-चढ़ाव आम लोगों के लिए बड़ी चिंता बना रहता है. बजट 2026 में ऐसे उपायों की उम्मीद है, जिससे सप्लाई चेन मजबूत हो और खाद्य महंगाई को स्थिर रखा जा सके. इससे आम परिवारों को राहत मिल सकती है.
3. FY27 में फिस्कल घाटा 4.4% पर कायम रहने की संभावना
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार FY27 में ग्रॉस फिस्कल डेफिसिट को GDP के 4.4 प्रतिशत पर बनाए रख सकती है. FY25 में फिस्कल घाटा 4.8 प्रतिशत रहा था और FY26 के लिए भी 4.4 प्रतिशत का लक्ष्य रखा गया है. अगर सरकार इस लक्ष्य को हासिल करती है, तो यह आर्थिक अनुशासन और निवेशकों के भरोसे के लिहाज से सकारात्मक संकेत होगा.
4. कर्ज-GDP अनुपात पर सरकार का फोकस
भारत ने फिस्कल नीति में एक बड़ा बदलाव करते हुए अब फिस्कल घाटे के बजाय कर्ज-GDP अनुपात को मुख्य आधार बनाया है. सरकार का लक्ष्य FY31 तक इस अनुपात को करीब 50 प्रतिशत तक लाने का है. बजट 2026 में इस दिशा में उठाए जाने वाले कदम यह बताएंगे कि सरकार दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता को कितनी प्राथमिकता देती है.
5. पूंजीगत खर्च को मिल सकती है नई रफ्तार
FY26 में सीमित संसाधनों के चलते कैपेक्स की रफ्तार थोड़ी धीमी रही थी. अब उम्मीद है कि FY27 में सरकार फिर से पूंजीगत खर्च बढ़ाएगी. अनुमान है कि केंद्र सरकार का कैपेक्स साल-दर-साल करीब 13 प्रतिशत तक बढ़ सकता है. इससे इंफ्रास्ट्रक्चर, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को मजबूत समर्थन मिल सकता है.
6. रक्षा क्षेत्र पर खास नजर
कैपेक्स बढ़ने की उम्मीदों के बीच रक्षा क्षेत्र का बजट भी चर्चा में है. ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा देने और हालिया ऑपरेशन सिंदूर के बाद रक्षा तैयारियों पर जोर बढ़ा है. FY26 में एकमुश्त आपात रक्षा खरीद और बड़े रक्षा प्रस्तावों को मंजूरी दी गई थी. बजट 2026 में रक्षा उत्पादन और स्वदेशी तकनीक को और समर्थन मिलने की संभावना है.
7. टैरिफ से प्रभावित निर्यात सेक्टरों को राहत की आस
अमेरिका के टैरिफ दबाव का असर टेक्सटाइल, परिधान, सीफूड, जेम्स एंड ज्वेलरी और लेदर जैसे सेक्टरों पर पड़ा है. ये सेक्टर बजट 2026 से राहत की उम्मीद लगाए बैठे हैं. टैक्स छूट, इंसेंटिव या निर्यात समर्थन जैसे कदम इन उद्योगों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में टिके रहने में मदद कर सकते हैं.
8. इंडिया-ईयू FTA के बाद ऑटो सेक्टर पर फोकस
जनवरी में साइन हुए इंडिया-ईयू एफटीए के बाद ऑटो सेक्टर बजट में खास ध्यान का केंद्र बन गया है. इस समझौते के तहत यूरोपीय कारों पर लगने वाले ऊंचे टैरिफ को धीरे-धीरे घटाया जाएगा. प्रधानमंत्री ने भारतीय निर्माताओं से गुणवत्ता और प्रतिस्पर्धा बढ़ाने की अपील की है. बजट में ऑटो सेक्टर के लिए किसी भी तरह की घोषणा बाजार की दिशा तय कर सकती है.
9. घरेलू खपत बढ़ाने के लिए ऐलान संभव
वैश्विक स्तर पर टैरिफ तनाव और व्यापार चुनौतियों के बीच सरकार घरेलू खपत को मजबूत करना चाहती है. 2025 में जीएसटी रेशनलाइजेशन की घोषणा की गई थी. बजट 2026 में अगर खपत को बढ़ावा देने के लिए और कदम उठाए जाते हैं, तो इसका सीधा फायदा आम लोगों और बाजार दोनों को मिल सकता है.
10. कृषि और MSME फिर रहेंगे प्राथमिकता
पिछले बजट में सरकार ने कृषि और MSME को भारत के पहले और दूसरे ग्रोथ इंजन बताया था. इस बार भी इन सेक्टरों पर खास ध्यान रहने की उम्मीद है. किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण मांग को मजबूत करने और छोटे उद्योगों को सस्ता कर्ज देने जैसे कदम बजट 2026 का अहम हिस्सा हो सकते हैं. कुल मिलाकर, बजट 2026 से उम्मीदें काफी ऊंची हैं. अब देखना यह होगा कि सरकार टैक्स सुधार और जीएसटी जैसे बड़े ऐलान करती है या फिर संतुलन और सुधारों के रास्ते पर चलते हुए धीरे-धीरे बदलाव लाती है. बजट का हर फैसला आने वाले वित्त वर्ष में देश की आर्थिक दिशा तय करेगा.
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