भारत-अमेरिका ट्रेड डील को टेक्सटाइल उद्योग के लिए बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है. उद्योग के अनुसार अमेरिकी बाजार में भारत की हिस्सेदारी करीब 30 प्रतिशत है. ऐसे में यह समझौता भारतीय निर्यातकों की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति मजबूत करेगा. टैरिफ दबाव कम होने से कारोबार और रोजगार दोनों को नई गति मिलने की उम्मीद है.
अमेरिका के साथ ट्रेड डील से भारतीय टेक्सटाइल एक्सपोर्ट बढ़ने की उम्मीद. (Image:AI)
अमेरिकी बाजार में भारत को मिलेगी बढ़त
अपैरल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के अध्यक्ष शक्तिवेल ने कहा कि तिरुपुर जैसे बड़े टेक्सटाइल हब से होने वाले निर्यात में अमेरिका की हिस्सेदारी लगभग 30 प्रतिशत है. ऐसे में ट्रेड डील का असर सीधा निर्यातकों पर पड़ेगा. उन्होंने कहा कि इस समझौते से भारत को अमेरिकी बाजारों में अन्य प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में बेहतर स्थिति मिलेगी. इससे ऑर्डर बढ़ने और नए खरीदार जुड़ने की संभावना है, जो उद्योग के लिए सकारात्मक संकेत है.
रोजगार और क्षमता विस्तार पर फोकस
उद्योग प्रतिनिधियों के अनुसार भारत पहले ही यूके, ओमान, न्यूजीलैंड और यूरोपीय यूनियन के साथ ट्रेड डील कर चुका है, जिनका लाभ अब धीरे-धीरे दिखने लगा है. शक्तिवेल ने कहा कि इन समझौतों से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे. हालांकि उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि आने वाले समय में लेबर की कमी एक चुनौती बन सकती है. ऐसे में इंडस्ट्री को उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ स्किल डेवलपमेंट पर भी ध्यान देना होगा.
टैरिफ नुकसान की भरपाई की उम्मीद
तिरुपुर एक्सपोर्ट्स एसोसिएशन के संयुक्त सचिव कुमार दुरईसामी ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील पर बातचीत काफी समय से चल रही थी. इस दौरान अमेरिका ने भारत पर भारी टैरिफ लगाए थे, जिससे निर्यातकों को नुकसान उठाना पड़ा. अब ट्रेड डील होने से बीते छह महीनों में हुए नुकसान की भरपाई की उम्मीद बढ़ी है. इससे बिजनेस दोबारा रफ्तार पकड़ सकता है और निवेशकों का भरोसा लौट सकता है.
टेक्सटाइल सेक्टर के लिए नए अवसर
ग्लोबल बिजनेस फाउंडेशन से जुड़े हिरेन गांधी ने कहा कि अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और उपभोक्ता बाजार है. टैरिफ के बाद अमेरिका को भी यह समझ आया कि भारत जैसे बड़े सप्लायर को नजरअंदाज करना आसान नहीं है. यही कारण है कि यह ट्रेड डील सामने आई है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस समझौते से भारत के टेक्सटाइल सेक्टर के लिए नए अवसर खुलेंगे, जबकि सरकार ने किसानों, डेयरी और मछुआरों के हितों से कोई समझौता नहीं किया है.
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Rakesh Singh is a chief sub editor with 14 years of experience in media and publication. International affairs, Politics and agriculture are area of Interest. Many articles written by Rakesh Singh published in …और पढ़ें
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