इस डील के बाद बाजार में जबरदस्त तेजी आई और सेंसेक्स इंट्राडे ट्रेड में 4200 अंकों से ज्यादा उछलकर 85,871.73 के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया. शेयर बाजार में जबरदस्त तेजी देखने को मिली और कारोबार के दौरान सेंसेक्स करीब 4200 पॉइंट तक उछल गया, हालांकि दिन के अंत में यह इससे कम बढ़त के साथ बंद हुआ. ब्रोकरेज का मानना है कि अमेरिका की ओर से भारतीय सामानों पर रेसिप्रोकल टैरिफ में कटौती से भारत के एक्सटर्नल बैलेंस पर दबाव कम होगा और ग्रोथ आउटलुक बेहतर होगा.
गोल्डमैन सैक्स की राय
गोल्डमैन सैक्स (Goldman Sachs) ने कहा है कि कम टैरिफ की वजह से 2026 में भारत का करंट अकाउंट डेफिसिट GDP के करीब 0.25 फीसदी तक घट सकता है. इससे CAD घटकर करीब 0.8 फीसदी के स्तर पर आ सकता है. ब्रोकरेज का मानना है कि डील पूरी तरह लागू होने के बाद कैपिटल इनफ्लो में सुधार आएगा, जिससे रुपये को सपोर्ट मिलेगा.
गोल्डमैन सैक्स के मुताबिक रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (Reserve Bank of India) अब अपने रेट कट साइकिल के आखिरी चरण में है और 2026 तक रेपो रेट 5.25 फीसदी पर स्थिर रह सकता है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि यह ट्रेड एग्रीमेंट भारत को अन्य एशियाई उभरते बाजारों के मुकाबले एक्सपोर्ट के मामले में थोड़ी मजबूत स्थिति में लाता है.
बर्नस्टीन और नोमुरा का नजरिया
बर्नस्टीन (Bernstein) ने कहा कि भारत को लेकर बेहतर होते सेंटिमेंट के बीच यह निवेश के लिए अच्छा समय है, भले ही हाल के महीनों में कॉरपोरेट अर्निंग थोड़ी कमजोर रही हो. ब्रोकरेज का मानना है कि आगे चलकर अर्निंग रिकवरी बाजार को नया सपोर्ट दे सकती है.
नोमुरा (Nomura) ने विदेशी निवेश की वापसी पर जोर दिया है. उसके मुताबिक FY26 में कमजोर रहने के बाद FPI और FDI फ्लो में धीरे धीरे रिवर्सल देखने को मिल सकता है. नोमुरा FY27 में करीब 7 बिलियन डॉलर के बैलेंस ऑफ पेमेंट सरप्लस का अनुमान लगा रहा है. साथ ही टेक्सटाइल और मैन्युफैक्चरिंग जैसे लेबर इंटेंसिव सेक्टर पर मार्जिन प्रेशर भी टैरिफ घटने से कम होगा.
BofA और घरेलू ब्रोकरेज का आकलन
BofA सिक्योरिटीज (BofA Securities) का कहना है कि भारत द्वारा अमेरिकी प्रोडक्ट्स के लिए बाजार खोलने से टेक्नोलॉजी इम्पोर्ट बढ़ सकता है और लॉन्ग टर्म अमेरिकी निवेश को बढ़ावा मिलेगा. ब्रोकरेज के अनुसार रुपये में कुछ कमजोरी रहने के बावजूद नए टैरिफ स्ट्रक्चर का असर सीमित रहेगा.
BofA का अनुमान है कि स्टील, एल्युमिनियम और ऑटोमोबाइल जैसे प्रोडक्ट्स पर मौजूदा अमेरिकी टैरिफ को जोड़ने के बाद भी भारत का इफेक्टिव टैरिफ रेट घटकर करीब 12 से 13 फीसदी रह सकता है, जो पहले 30 से 35 फीसदी के आसपास था. वहीं मोतीलाल ओसवाल (Motilal Oswal) ने कहा कि अब बाजार का फोकस कॉरपोरेट अर्निंग में सुधार पर रहेगा.
इस ट्रेड डील का मतलब क्या है
असल में भारत और अमेरिका के बीच यह ट्रेड डील दोनों देशों के बीच व्यापार को आसान बनाने की दिशा में बड़ा कदम है. इस समझौते के तहत कई भारतीय प्रोडक्ट्स पर अमेरिकी टैरिफ घटाए गए हैं, जिससे भारतीय एक्सपोर्टर्स को सीधी राहत मिलेगी. इसका असर टेक्सटाइल, मैन्युफैक्चरिंग और कंज्यूमर गुड्स जैसे सेक्टर में देखने को मिल सकता है.
इस डील का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे भारत के लिए विदेशी निवेश का रास्ता और मजबूत होता है. लंबे समय से कमजोर पड़े FII फ्लो को लेकर जो चिंता थी, उस पर अब ब्रोकरेज पॉजिटिव नजर आ रहे हैं. यही वजह है कि इस ट्रेड एग्रीमेंट को भारतीय शेयर बाजार और इकोनॉमी दोनों के लिए बड़ा पॉजिटिव सिग्नल माना जा रहा है.
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