मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब अमेरिका में ईंधन की कीमतों पर साफ दिखने लगा है. कच्चे तेल के दाम 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जाने के बाद पेट्रोल महंगा हो गया है. एक हफ्ते के भीतर पेट्रोल की कीमत में करीब 59 सेंट प्रति गैलन की तेज बढ़ोतरी हुई है. इससे महंगाई की चिंता बढ़ गई है और चुनाव से पहले राजनीतिक दबाव भी बढ़ रहा है.
अमेरिका में ईंधन महंगा हुआ तो राजनीति गर्म. (Image:AI)
तेल 100 डॉलर पार, ईंधन बाजार में उथल-पुथल
मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक बाजार में तेल की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है. इसी वजह से कच्चे तेल की कीमतें बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गईं, जो पिछले कुछ वर्षों में एक बड़ा उछाल माना जा रहा है. जब कच्चे तेल के दाम बढ़ते हैं तो उसका सीधा असर पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर पड़ता है. अमेरिका में भी यही स्थिति देखने को मिल रही है, जहां पेट्रोल के साथ-साथ डीजल की कीमतें भी तेजी से बढ़ी हैं.
कई राज्यों में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी
अमेरिका के कई राज्यों में पेट्रोल की कीमतों में एक हफ्ते के भीतर तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है. इंडियाना, फ्लोरिडा, मिशिगन और ओहायो जैसे राज्यों में पेट्रोल के दाम 50 सेंट से ज्यादा बढ़ गए हैं. वहीं कुछ राज्यों में कीमतें पहले से ही ज्यादा हैं. उदाहरण के तौर पर कैलिफोर्निया में पेट्रोल की औसत कीमत करीब 5.14 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गई है, जबकि वॉशिंगटन और हवाई में भी कीमतें काफी ऊंची हैं. दूसरी तरफ कंसास, ओक्लाहोमा और अर्कांसस जैसे राज्यों में कीमतें अपेक्षाकृत कम बनी हुई हैं.
महंगाई और चुनावी राजनीति पर असर
ईंधन की बढ़ती कीमतें सिर्फ आम लोगों के खर्च को ही प्रभावित नहीं करतीं, बल्कि राजनीति पर भी इसका असर पड़ता है. अमेरिका में मिडटर्म चुनाव नजदीक हैं और ऐसे समय में पेट्रोल की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी सरकार और सत्तारूढ़ दल के लिए चुनौती बन सकती है. महंगाई पहले से ही लोगों के लिए चिंता का विषय है और अब ईंधन महंगा होने से दबाव और बढ़ सकता है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं तो यह चुनावी मुद्दा भी बन सकता है.
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Rakesh Singh is a chief sub editor with 14 years of experience in media and publication. International affairs, Politics and agriculture are area of Interest. Many articles written by Rakesh Singh published in …और पढ़ें
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