सऊदी अरामको के सीईओ अमीन नासिर ने तेल बाजार को लेकर गंभीर चेतावनी दी है. उनके मुताबिक स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के बंद होने से रोजाना करीब 2 करोड़ बैरल कच्चा तेल बाजार में कम हो रहा है. उन्होंने कहा कि इससे वैश्विक सप्लाई पर बड़ा दबाव बन गया है.
अमीन नासिर ने कहा है कि यह दुनिया का सबसे बड़ा तेल और गैस संकट बन सकता है.
अमीन नासिर ने बताया कि सामान्य दिनों में स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से रोज करीब 100 तेल टैंकर गुजरते थे. लेकिन मौजूदा हालात में यह संख्या गिरकर बहुत कम रह गई है. उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी मात्रा में सप्लाई अचानक रुक जाना तेल बाजार के लिए बहुत बड़ा झटका है. यह केवल एक क्षेत्र की समस्या नहीं है, बल्कि इसका असर दुनिया भर की ऊर्जा सप्लाई पर पड़ सकता है.
अरामको ने शुरू किया इमरजेंसी प्लान
नासिर के मुताबिक इस संकट से निपटने के लिए सऊदी अरामको ने अपने इमरजेंसी प्लान को लागू कर दिया है. उन्होंने बताया कि कंपनी अपनी ईस्ट वेस्ट पाइपलाइन का इस्तेमाल कर रही है, जिसकी क्षमता करीब 70 लाख बैरल प्रतिदिन है. इस पाइपलाइन के जरिए तेल को रेड सी के यानबू पोर्ट तक पहुंचाया जा रहा है ताकि हॉर्मुज के रास्ते को बायपास किया जा सके. नासिर ने कहा कि इस व्यवस्था के जरिए कंपनी अपने सामान्य निर्यात का करीब 70 प्रतिशत हिस्सा यानी लगभग 50 लाख बैरल प्रतिदिन बहाल करने की कोशिश कर रही है. बाकी करीब 20 लाख बैरल तेल सऊदी अरब की घरेलू रिफाइनरियों में इस्तेमाल किया जाएगा.
स्टोरेज से सप्लाई, लेकिन ज्यादा दिन संभव नहीं
अमीन नासिर ने यह भी बताया कि फिलहाल कंपनी खाड़ी क्षेत्र के बाहर मौजूद अपने भंडार से ग्राहकों की मांग पूरी करने की कोशिश कर रही है. लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि यह व्यवस्था लंबे समय तक नहीं चल सकती. उनके मुताबिक अगर सप्लाई के रास्ते जल्द सामान्य नहीं हुए तो दुनिया को बड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है.
तेल की कीमतें पहले ही रिकॉर्ड के करीब
नासिर ने कहा कि इस संकट का असर कीमतों पर साफ दिखाई दे रहा है. इस सप्ताह अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमत करीब 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जो 2022 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है. उन्होंने कहा कि तेल की कमी का असर केवल ट्रांसपोर्ट सेक्टर तक सीमित नहीं रहेगा. एविएशन, खेती और ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरिंग जैसे कई उद्योग भी इससे प्रभावित हो सकते हैं.
दुनिया के पास बैकअप भी सीमित
नासिर के मुताबिक मौजूदा समय में वैश्विक तेल भंडार भी बहुत ज्यादा मजबूत स्थिति में नहीं हैं. उन्होंने कहा कि पिछले पांच वर्षों में पहली बार ऐसा हुआ है जब दुनिया के स्टोरेज स्तर इतने नीचे आ गए हैं. इसका मतलब है कि अगर सप्लाई में लंबी बाधा आई तो बाजार के पास ज्यादा बैकअप नहीं रहेगा.
रास तनुरा रिफाइनरी भी बनी चुनौती
सऊदी अरामको के प्रमुख ने यह भी खुलासा किया कि कंपनी अपनी रास तनुरा रिफाइनरी को दोबारा शुरू करने की कोशिश कर रही है. इस रिफाइनरी पर पिछले सप्ताह ड्रोन हमला हुआ था, जिससे उत्पादन प्रभावित हुआ. नासिर ने कहा कि इससे यह साफ है कि कंपनी को सिर्फ समुद्री रास्तों की समस्या ही नहीं, बल्कि जमीनी ढांचे पर हमलों का भी सामना करना पड़ रहा है.
दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है बड़ा असर
अमीन नासिर ने साफ शब्दों में कहा कि अगर हॉर्मुज का रास्ता लंबे समय तक बाधित रहा तो इसके गंभीर परिणाम होंगे. उन्होंने कहा कि सऊदी अरब अपनी पाइपलाइनों और दूसरे रास्तों के जरिए दुनिया तक तेल पहुंचाने की पूरी कोशिश कर रहा है. लेकिन अगर यह संकट लंबा चला तो वैश्विक अर्थव्यवस्था को बड़े झटके का सामना करना पड़ सकता है.
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जय ठाकुर 2018 से खबरों की दुनिया से जुड़े हुए हैं. 2022 से News18Hindi में सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं और बिजनेस टीम का हिस्सा हैं. बिजनेस, विशेषकर शेयर बाजार से जुड़ी खबरों में रुचि है. इसके अलावा दे…और पढ़ें
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