भारत में उर्वरकों की तत्काल कमी नहीं है. भारत दुनिया का सबसे बड़ा यूरिया आयातक है और मानसून की शुरुआत से पहले जून में यूरिया की मांग चरम पर होती है. इसी मांग को पूरा करने के लिए भारत ने पहले से ही कदम उठाने शुरू कर दिए हैं.
सरकार किसी भी स्थिति में किसानों को खाद की कमी नहीं होने देना चाहती.
फिलहाल भारत में उर्वरकों की तत्काल कमी नहीं है. भारत दुनिया का सबसे बड़ा यूरिया आयातक है और मानसून की शुरुआत से पहले जून में यूरिया की मांग चरम पर होती है. इस समय सीमा को ध्यान में रखते हुए, भारत इस महीने के अंत या अप्रैल की शुरुआत में यूरिया आयात के लिए एक बड़ा ग्लोबल टेंडर जारी कर सकता है. सरकार केवल चीन पर निर्भर नहीं रहना चाहती. सूत्रों के अनुसार, यदि मध्य पूर्व से गैस की कमी बनी रहती है और उत्पादन प्रभावित होता है तो भारत रूस, इंडोनेशिया, मलेशिया और मिस्र जैसे वैकल्पिक स्रोतों से यूरिया आयात कर सकता है.
9.8 मिलियन टन यूरिया का आयात
उर्वरक मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 31 मार्च को समाप्त होने वाले चालू वित्त वर्ष में भारत अब तक 9.8 मिलियन टन यूरिया का आयात कर चुका है. अगले तीन महीनों में 1.7 मिलियन टन और आने की संभावना है. भारत चावल का दुनिया का सबसे बड़ा निर्यातक है. इसके अलावा गेहूं, चीनी और कपास के उत्पादन में भी भारत अग्रणी है. ऐसे में कृषि उपज को प्रभावित होने से बचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है.
क्यों हो सकती है यूरिया की किल्लत
अमेरिका-इज़राइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के कारण वैश्विक व्यापार मार्ग प्रभावित हुए हैं. भारत को भारी मात्रा में एलएनजी की आपूर्ति करने वाले देश कतर ने पिछले सप्ताह ईंधन की आपूर्ति में कटौती की है. इसका सीधा असर भारत के उर्वरक संयंत्रों पर पड़ा है. वर्तमान में उर्वरक कंपनियों को उनकी जरूरत का केवल 70 प्रतिशत गैस ही मिल पा रहा है. यूरिया उत्पादन के लिए प्राकृतिक गैस एक अनिवार्य कच्चा माल है, इसलिए एनएनजी में में आई यह कमी आने वाले समय में चुनौती बन सकती है. इसी को देखते हुए सरकार पहले ही सतर्क हो गई है.
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