वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में जानकारी दी कि फिलहाल महंगाई पर इसका बड़ा असर नहीं पड़ने वाला है. उन्होंने बताया कि भारत की महंगाई अभी निचले स्तर पर है. आरबीआई की अक्टूबर 2025 की मॉनेटरी पॉलिसी रिपोर्ट के अनुसार, अगर कच्चा तेल बेसलाइन से 10% महंगा होता है और पूरी तरह घरेलू कीमतों में पास होता है, तो महंगाई सिर्फ 30 बेसिस पॉइंट्स (0.3%) बढ़ सकती है. मध्यम अवधि में असर कई बातों पर निर्भर करेगा, जैसे रुपये की कीमत, वैश्विक मांग-आपूर्ति, मौद्रिक नीति और महंगाई की स्थिति.
ब्रेंट क्रूड की कीमत
सरकारी अधिकारी और इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स ने बताया कि भारतीय रिफाइनरी कंपनियां, खासकर सरकारी आईओसी, एचपीसीएल और बीपीसीएल, मजबूत स्थिति में हैं. इन तीनों कंपनियों का FY26 के पहले नौ महीनों में नेट प्रॉफिट 192% बढ़कर ₹57,810 करोड़ हो गया, जो पिछले साल इसी समय ₹19,768 करोड़ था. ये कंपनियां पंप में कीमतें स्थिर रख सकती हैं. अगर युद्ध और बढ़ा नहीं और पश्चिम एशिया में एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर असर नहीं पड़ा, तो ब्रेंट क्रूड $130 प्रति बैरल तक जा सकता है, लेकिन उस स्तर तक भी सरकारी रिफाइनरी पेट्रोल-डीजल की रिटेल कीमतें नहीं बढ़ाएंगी.
जून 2022 में जब ब्रेंट $120 से ऊपर था ($123.58 तक), तब दिल्ली में पेट्रोल ₹96.72 और डीजल ₹89.62 प्रति लीटर था. उसके बाद मार्च 2024 से कीमतें ₹2 कम करके पेट्रोल ₹94.72 और डीजल ₹87.62 पर लाई गईं. 30 अक्टूबर 2024 को मार्केटिंग कॉस्ट एडजस्टमेंट के कारण सिर्फ 5 पैसे बढ़ोतरी हुई, अब दिल्ली में पेट्रोल ₹94.77 और डीजल ₹87.67 है. मई 2022 से कीमतें लगभग स्थिर हैं.
स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकार उपभोक्ताओं को अंतरराष्ट्रीय कीमतों के उतार-चढ़ाव से बचाने के लिए एक्साइज ड्यूटी में बदलाव करती रहती है. पिछले साल कम कीमतों से फायदा उठाकर 8 अप्रैल 2025 को स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (SAED) ₹2 बढ़ाई गई, जिससे सालाना ₹34,000 करोड़ अतिरिक्त राजस्व मिलेगा. पेट्रोल पर SAED अब ₹13 और डीजल पर ₹10 प्रति लीटर है. इससे पहले नवंबर 2021 और मई 2022 में एक्साइज कटौती से कीमतें ₹13 (पेट्रोल) और ₹16 (डीजल) कम हुई थीं.
S&P ग्लोबल एनर्जी के जिम बर्कहार्ड ने कहा कि अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच युद्ध अगर होर्मुज से तेल की सप्लाई रोक दे, तो यह इतिहास का सबसे बड़ा तेल सप्लाई डिसरप्शन हो सकता है. शुरुआत में एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमला नहीं हुआ था, लेकिन अब सऊदी अरब और कतर की सुविधाओं पर अटैक से बाजार में और झटका लगा है. फिलहाल भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर हैं और सरकार उपभोक्ताओं को राहत देने की कोशिश जारी रखेगी.
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