ट्रंप ने लिखा कि यह ऐतिहासिक व्यापार डील अमेरिकी इंडस्ट्रियल बेस को फिर से मजबूत करेगी. इससे अमेरिका में बहुत सारी अच्छी नौकरियां आएंगी और राष्ट्रीय सुरक्षा भी मजबूत होगी. उन्होंने कहा कि ये प्रोजेक्ट इतने बड़े हैं कि इन्हें टैरिफ के बिना नहीं किया जा सकता था. ट्रंप ने पहले जापान पर ज्यादा टैरिफ लगाने की धमकी दी थी, लेकिन समझौते के बाद टैरिफ 15 प्रतिशत पर कम कर दिया गया. अगर जापान निवेश नहीं करता तो टैरिफ फिर से बढ़ सकते थे.
अहम प्रोजेक्ट्स को पूरा करने की तैयारी
अब तीन मुख्य प्रोजेक्ट्स के बारे में बताया गया है. पहला प्रोजेक्ट टेक्सास में है, जहां लिक्विफाइड नेचुरल गैस यानी एलएनजी का एक बड़ा प्लांट बनेगा. यह अमेरिका के एनर्जी एक्सपोर्ट को बढ़ाएगा और देश को एनर्जी में और मजबूत बनाएगा. दूसरा प्रोजेक्ट ओहियो में है, जहां एक बहुत बड़ा गैस से चलने वाला पावर प्लांट लगेगा. ट्रंप ने कहा कि यह इतिहास का सबसे बड़ा ऐसा प्लांट होगा. तीसरा प्रोजेक्ट जॉर्जिया में है, जहां क्रिटिकल मिनरल्स प्रोसेसिंग प्लांट बनेगा. इसमें सिंथेटिक डायमंड या इंडस्ट्रियल डायमंड जैसी चीजें बनेंगी. इससे अमेरिका विदेशी स्रोतों पर निर्भरता कम करेगा, खासकर महत्वपूर्ण कच्चे माल पर. ये तीनों प्रोजेक्ट एनर्जी, पावर और मिनरल्स जैसे स्ट्रैटेजिक क्षेत्रों में हैं.
हजारों नौकरियां होंगी तैयार
ट्रंप ने ओहियो का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने वहां तीन बार जीत हासिल की है. उन्होंने पूरे पोस्ट में उत्साह दिखाया और कहा कि अमेरिका अब फिर से बन रहा है, प्रोडक्शन कर रहा है और जीत रहा है. यह अमेरिका और जापान दोनों के लिए बहुत ऐतिहासिक समय है. यह समझौता पिछले साल जुलाई में हुआ था. जापान ने अमेरिका में निवेश करने का वादा किया था ताकि ट्रंप जापानी कारों और दूसरी चीजों पर टैरिफ कम करें. जापान की नई प्रधानमंत्री सनाए तकाइची ने भी इस पर सहमति जताई है. ट्रंप ने उन्हें बधाई दी है और कहा है कि मार्च में वह वाशिंगटन आएंगी जहां दोनों नेता इस समझौते को आगे बढ़ाने पर बात करेंगे. तकाइची ने चुनाव में जीत के बाद अमेरिका के साथ गहरे सहयोग का वादा किया था.
ग्लोबल इकोनॉमी पर पड़ेगा असर
ट्रंप ने कहा कि दक्षिण कोरिया के साथ ऐसा समझौता में देरी हो रही है, तो वहां टैरिफ बढ़ सकते हैं. लेकिन जापान के साथ डील अच्छी चल रही है. ये निवेश अमेरिका की एनर्जी इंडिपेंडेंस, मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन को मजबूत करेंगे. इससे हजारों नौकरियां आएंगी और अमेरिका विदेशी निर्भरता से मुक्त होगा. अमेरिका-जापान के ऐसे बड़े डील से ग्लोबल इकोनॉमी पर असर पड़ता है. एनर्जी और मिनरल्स के प्रोजेक्ट से दुनिया भर में कीमतें और सप्लाई प्रभावित हो सकती हैं .
भारत और जापान के आधिकारिक कूटनीतिक संबंध की बात करें तो ये साल 1952 में शुरू हुए. उस समय भारत ने द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद जापान पर लगी मित्र देशों की पाबंदियां हटाने के समझौते का समर्थन किया. भारत उन शुरुआती देशों में शामिल था जिसने जापान को दोबारा अंतरराष्ट्रीय समुदाय में जगह दिलाने में मदद की. समय के साथ दोनों देशों के रिश्ते मजबूत होते गए और आज भी उनकी साझेदारी लगातार आगे बढ़ रही है.
जापान भारत को ज्यादातर ऑटोमोबाइल, ऑटो पार्ट्स, इलेक्ट्रॉनिक सामान, मशीनरी और स्टील भेजता है, जबकि भारत जापान को पेट्रोकैमिकल्स, कपास, लौह अयस्क, आभूषण और समुद्री उत्पाद निर्यात करता है. साल 2024 तक दोनों देशों के बीच कुल व्यापार लगभग 21 अरब डॉलर रहा. इसमें भारत का निर्यात करीब 6–7 अरब डॉलर के आसपास और जापान से आयात लगभग 13–14 अरब डॉलर रहा, जिससे भारत का व्यापार घाटा बढ़ा है. हालांकि इस असंतुलन को कम करने के लिए दोनों देश लगातार प्रयास कर रहे हैं. अमेरिका-जापान के ऐसे बड़े डील से आगे चलकर भारत को भी कुछ फायदे मिलने की उम्मीद की जा सकती है.
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