भारत और यूरोपीय संघ के बीच फ्री ट्रेड डील को लेकर अमेरिका की नाराज़गी खुलकर सामने आ गई है. डावोस 2026 में अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने यूरोप पर तीखा हमला बोला है. रूसी तेल, टैरिफ और भारत-EU समझौते ने वैश्विक व्यापार राजनीति को फिर गर्मा दिया है.
भारत से डील के लिए यूरोप पर आरोप
स्कॉट बेसेंट ने कहा कि अमेरिका 2025 से रूस से जुड़े तेल व्यापार पर तीसरे देशों पर 25 फीसदी का जुर्माना लगा रहा है और इसे उसने ‘सफल कदम’ बताया. लेकिन उनके मुताबिक यूरोपीय सहयोगी इस मुहिम में शामिल नहीं हुए. बेसेंट ने कहा कि यूरोप ने जानबूझकर दूरी बनाई क्योंकि वह भारत के साथ लंबे समय से अटकी फ्री ट्रेड डील को पूरा करना चाहता था. उन्होंने यूरोपीय रवैये को ‘वर्च्यू सिग्नलिंग’ करार देते हुए उसकी आलोचना की.
रूसी तेल को लेकर तीखी टिप्पणी
अमेरिकी वित्त मंत्री यहीं नहीं रुके. उन्होंने आरोप लगाया कि यूरोपीय देश भारत में रिफाइंड रूसी तेल खरीदकर अप्रत्यक्ष रूप से उसी युद्ध को फंड कर रहे हैं, जिससे वे खुद को बचाने की बात करते हैं. बेसेंट ने इसे ‘विडंबना और मूर्खता’ बताते हुए कहा कि आखिरकार रिफाइंड उत्पादों का सबसे बड़ा खरीदार यूरोप ही निकला. यह बयान ऐसे समय आया है, जब यूरोपीय आयोग की प्रमुख उर्सुला वॉन डेर लेयेन भारत दौरे पर आने वाली हैं और इस समझौते को ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ बताया जा रहा है.
भारत पर टैरिफ हटने के संकेत
इंटरव्यू में बेसेंट ने यह भी संकेत दिया कि भारत पर लगाए गए 25 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ को हटाने का रास्ता निकल सकता है. उन्होंने कहा कि अमेरिकी टैरिफ के चलते भारत का रूसी तेल आयात काफी घटा है और अब हालात ऐसे बन सकते हैं कि पेनल्टी हटाने पर विचार किया जाए. फिलहाल अमेरिका भारत पर कुल 50 फीसदी टैरिफ लगाता है, जिसमें रूसी तेल से जुड़ा जुर्माना भी शामिल है. भारत इन टैरिफ को लगातार ‘अनुचित और अव्यावहारिक’ बताता रहा है और कहता है कि उसकी ऊर्जा नीति राष्ट्रीय हित से तय होती है.
आगे और बढ़ सकता है टकराव
इस बीच रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने रूसी तेल के सेकेंडरी व्यापार पर 500 फीसदी टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा है. बेसेंट ने कहा कि यह देखना होगा कि यह बिल पास होता है या नहीं, हालांकि राष्ट्रपति ट्रंप के पास पहले से ही कड़े कदम उठाने का अधिकार है. गौरतलब है कि दिसंबर में भारत रूसी तेल के खरीदारों में तीसरे स्थान पर आ गया था, क्योंकि रिलायंस इंडस्ट्रीज और सरकारी रिफाइनरियों ने आयात घटाया. ऐसे में भारत-EU डील और अमेरिकी दबाव आने वाले दिनों में वैश्विक राजनीति और व्यापार में नई खींचतान पैदा कर सकते हैं.
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Rakesh Singh is a chief sub editor with 14 years of experience in media and publication. International affairs, Politics and agriculture are area of Interest. Many articles written by Rakesh Singh published in …और पढ़ें
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